प्रदेश में सेब उत्पादन पर अब काेराेना संकट और स्कैब की मार का असर दिखने लगा है। गत वर्ष के मुकाबले इस साल अभी तक सेब सीजन 40 फीसदी कम ही सेब ही मार्केट में पहुंचा है। देश प्रदेश की विभिन्न मंडियाें में अभी तक 25 लाख 50 हजार 182 सेब की पेटियां भेजी गई हैं।
पिछले साल 19 अगस्त तक 66 लाख 68 हजार 272 सेब की पेटियाें काे देश प्रदेश की विभिन्न मंडियाें में पहुंच चुकी थी। उससे पहले साल यानि 2018 में अाज तक 33 लाख 56 हजार 468 सेब की पेटियाें काे देश प्रदेश की विभिन्न मंडियाें में भेजा गया था। ये सेब 20 किलाे की पैकिंग में विभिन्न मंडियाें में भेजा गया है। यानि अभी तक प्रदेश से 51 हजार से अधिक मिट्रिक टन सेब प्रदेश से बाहर जा चुका है। जाे गत दाे वर्षाें में इससे कहीं अधिक था। 2019 में 1.33 लाख मिट्रिक टन और 2018 में 67 हजार 129 मिट्रिक टन सेब विभिन्न मंडियाें में भेजा गया था।
5665 ट्रकाें में ढाेई गई 25 लाख 50 हजार सेब की पेटियां
सेब की पैदावार कम हाेने की वजह से इस बार सेब ढुलाई के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले ट्रकाें काे भी कम ही इस्तेमाल में लाया जा सका है। सेब सीजन के दाैरान इस बार प्रदेश में 5665 ट्रकाें में 25 लाख से अधिक सेब की पेटियाें काे मंडियाें में पहुंचाया गया है। 2019 में 14 हजार 813 ट्रकाें काे इस्तेमाल में लाया गया था अाैर 2018 में 7460 ट्रकाें में सेब की ढुलाई की गई थी। सेब की कम पैदावार के कारण इसका राेजगार पर भी असर पड़ा है।
राॅयल डिलिशियस केे बागवानों को दाे साल बाद मिले अच्छे दाम
भले ही इस बार सेब सीजन कमजोर चल रहा हा़े लेकिन राॅयल डिलिशियस की मार्केट में खूब धूम है। गत दाे वर्षाें के मुकाबले इस साल राॅयल डिलिशियस की 20 किलाे की सेब की पेटी 2500 रुपए में बिक रही है। 2019 में ये 2000 अाैर 2018 में 1320 रुपए में 20 किलाे की पेटी बिकी थी।
खरीद के लिए कलेक्शन सेंटर भी गत दाे सालाें के मुकाबले खुले ज्यादा
पिछले साल की अपेक्षा इस साल कलेक्शन सेंटर भी ज्यादा खुले हैं। कोरोना काल में बागवानाें की सुविधा काे ध्यान में रखते हुए 266 कलेक्शन सेंटर खाेले गए हंै। इसमें एचपीएमसी के 146, िहमफेड के 120 केंद्र शामिल है। गत वर्ष सेब खरीद के लिए 262 और 2018 में 217 केंद्र ही खुले थे।
1548 मीट्रिक टन सेब एमअाईएस में खरीदा गया
एमआईएस के तहत बागवानों से अभी तक 1548 मीट्रिक टन सेब खरीदा गया है, जबकि गत वर्ष ये 3681 एमटी सेब खरीदा गया था। सरकार बागवानाें से एमअाईएस के तहत सी ग्रेड का सेब खरीदती है जाे इस बार स्कैब के कारण कम खरीदा जा रहा है। बागवानों का कम सेब खरीद होने से उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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