रिज के वाटर टैंक से अब शहर को पानी की सप्लाई होने लगेगी। टैंक की रिपेयरिंग का काम लगभग पूरा कर दिया गया है। रिपेयिरंग करने वाली कंपनी अगले एक सप्ताह में इस टैंक को एसजेपीएनएल को सौंपेगी। इसके बाद टैंक में पानी स्टोर कर शहर के बड़े हिस्से को यहीं से मिलने लगेगा। अभी संजौली के वाटर टैंक से ही पानी की सप्लाई की जा रही है, इससे पानी का शेड्यूल भी गड़बड़ा गया है। मगर अब फिर से इसी टैंक से पानी की समय पर सप्लाई होने लगेगी।
अंग्रेजों के जमाने के रिज वाटर टैंक की दरारों को भरने के लिए नई पॉलीयूरेथेन एनआरवी ( नॉन रिटर्न वॉल्व) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए टैंक में आई दरारों की ग्रूविंग यानि दरारों को खुरचकर इनमें पॉलीयूरेथेन नामक मैटीरियल से मशीनों से इंजेक्ट किया गया है। इस मैटीरियल से दरारों को मजबूती से कवर किया गया है। ऐसे में अब इस टैंक में दरारें नहीं हैं।
एसजेपीएनएल के मैनेजर महबूब शेख ने का कहना है कि रिज के टैंक की रिपेयरिंग के लिए एडवांस टेक्नीक अपनाई गई है। टैंक की दरारों को भरने के बाद इसमें कोटिंग का काम भी तकरीबन पूरा कर लिया गया है। रिपेयरिंग करने वाली कंपनी जल्द ही एसजेपीएनएल को यह टैंक सौंपेगी। इसके बाद अब इसी टैंक से ही पानी की सप्लाई दी जाएगी।
नौ चैबर में से चार में आई थी दरारें, फ्लोर की छत भी थे क्षतिग्रस्त
पॉलीयूरिया की कोटिंग का काम भी पूरा
दरारों को भरने के बाद पूरे टैंक की पॉलीयूरिया से सरफेसिंग की गई है। पॉलीयूरिया टैंक के सरफेस को खराब नहीं होने देता। यही वजह है कि टैंक में इसकी कोटिंग मशीनों से की जा रही है। कोटिंग का यह काम भी तकरीबन पूरा किया जा चुका है और इसको अब फाइनल टच दिया जा रहा है। इस तरह अगले कुछ दिनों में यह टैंक पानी के स्टोरेज के लिए तैयार हो जाएगा।
तीन माह से हो रही रिपेयरिंग
वाटर टैंक की रिपेयरिंग का काम दिल्ली की रेनेस्को इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कंपनी कर रही है। रिपेयरिंग का काम बीते अक्टूबर माह में कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन इस बीच कंपनी के कर्मचारी कोरोना के चपेट में आ गए। इसके चलते दो सप्ताह से अधिक समय तक रिपेयरिंग का काम नहीं हो पाया। हालांकि इसके बाद टैंक की रिपेयरिंग का काम त्वरित गति से किया गया।
45 लाख लीटर पानी होता है स्टोर
ब्रिटिशकालीन इस वाटर टैंक के नौ चैंबर में से चार में दरारें आ गईं थीं। इसके अलावा कुछ जगह इसके फ्लोर और इसकी छत में भी दरारें थीं। करीब 45 लाख लीटर की कैपेसिटी के टैंक में दरारें आने से पानी का रिसाव होने लगा था। इससे आसपास के एरिया पर भी खतरा मंडराने लगा था।
स्थिति को भांपते हुए टैंक की रिपेयरिंग का प्लान बनाया गया। एसजेपीएनएल ने इसकी पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के विशेषज्ञों से रिपोर्ट तैयार करवाई। इसके बाद रिपेयरिंग के लिए टेंडर कर इसका काम रेनेस्को कंपनी को अवार्ड किया गया। यह काम करीब 1.85 करोड़ की लागत से किया गया है।
अब इसी टैंक से होने लगेगी पानी की सप्लाई
कंपनी रिपेयरिंग के बाद इस टैंक को एसजेपीएनएल को सौंपेगी। एक सप्ताह के भीतर ही एसजेपीएनएल को यह टैंक सौंप दिया जाएगा। इससे अब इसी टैंक में पानी स्टोरेज होने लगेगा और यहीं से पूरे सेंट्रल जोन को पानी की सप्लाई होने लगेगी। अभी रिपेयरिंग के लिए टैंक खाली किया गया है। ऐसे में सेंट्रल जोन के मालरोड, लोअर बाजार व अन्य क्षेत्रों के लिए बाईपास सिस्टम तैयार सीधे संजौली टैंक से पानी दिया जा रहा है। इस कारण पानी की टाइमिंग भी गड़बड़ा गई है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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