कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने शिमला शहर में बीजेपी की सरकार व नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली से बिगड़ती पेयजल व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त किया है। माकपा ने आराेप लगाया है कि प्रदेश की भाजपा सरकार व नगर निगम के द्वारा कंपनी बना कर पेयजल की व्यवस्था से निजीकरण की मुहिम पूर्णतःविफल हो गई है।
शहरवासियों को न तो मीटर रीडिंग के आधार पर मासिक बिल मिल रहे हैं और 8-9 महीने बाद जो हजारों व लाखों रुपए के बिल दिए गए हैं, वह बिल्कुल भी व्यवहारिक व न्यायोचित नहीं है। माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य संजय चाैहान का कहना है कि नगर निगम व सरकार स्वंय मान गई है कि करीब 13 हजार मीटरों का उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिससे 50 प्रतिशत से अधिक पानी के बिल ही नहीं दे पा रहे हैं।
माकपा का आराेप है कि भाजपा सरकार पहले से ही प्रदेश व शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की पक्षधर रही है। वर्ष 2012 में भी तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था निजी कंपनी में सौंपने का कार्य कर दिया था। जिसे 2012 में सीपीएम के महापौर व उपमहापौर के नगर निगम में आने के पश्चात निरस्त कर दिया था। आज जिस प्रकार से सरकार व नगर निगम के द्वारा बनाई गई कंपनी पेयजल व्यवस्था के संचालन में पूर्णतः विफल हो गई है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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