प्रदेश में लाेगाें काे बायाेमैट्रिक प्रणाली से नहीं बल्कि आंखों से उनकी पहचान करके उसे राशन दिया जाएगा। इसके लिए डिपुओं में आइरिस स्कैनर मशीनें लगाई जा रही हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग 5 कराेड़ की लागत से इस मशीन काे खरीदेगा जाे प्रदेश के सभी 4900 से अधिक डिपुओं में रखी जाएगी। विभाग मशीन काे खरीदने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा। मंजूरी के बाद मशीन के खरीद के लिए विभाग टेंडर काॅल करेगा। राशन देने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिस कंपनी से किराए पर बायाेमैट्रिक मशीनें खरीदी हैं, विभाग ने उससे 2022 तक करार किया है।
अगर सरकार आइरिस स्कैनर की मशीनें खरीदने की मंजूरी दे देती है ताे विभाग इसके खरीद की प्रक्रिया शीघ्र शुरू कर देगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार ने कहा, लाेगाें काे आइरिस स्कैनर से राशन देने की तैयारी चल रही है। कई जगह बायाेमैट्रिक मशीनें लाेगाें की उंगलियाें के निशान नहीं ले पा रही हैं, इसलिए आइरिस स्कैनर से राशन दिया जाएगा।
नई मशीन काे खरीदने के लिए इसलिए लिया फैसला
विभाग ने काेराेना संकट काल में बायामैट्रिक प्रणाली पर लगी राेक काे ध्यान में रख कर आइरिस स्कैनर मशीन खरीदने का फैसला लिया है। दूसरा, वरिष्ठ नागरिकाें की अंगलियाें के निशान मिटने के कारण बायाेमैट्रिक प्रणाली में उसे कैच नहीं करना है। डिपुओं में रखी मशीन विभाग के लिए महंगा साैदा साबित हाे रही है। विभाग काे डिपुओं में रखी बायोमैट्रिक मशीन के हर माह प्रति मशीन 1048 किराए के अदा करने पड़ रहे हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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