हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के ईसी व कोर्ट चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने दोनों पदों पर कब्जा किया है, जबकि लेफ्ट और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। इस बार कांग्रेस अौर लेफ्ट समर्थित कर्मचारियों ने भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को हराने के लिए साझा मोर्चा बनाया था। इसके बावजूद भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। रजिस्ट्रार एवं निर्वाचन अधिकारी सुनील शर्मा का कहना है कि इस चुनाव में कुल 787 मतदाताओं में से 709 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
ईसी के लिए सीधे मुकाबले में भाजपा समर्थित विपिन कुमार को 375 वोट मिले, वहीं कांग्रेस समर्थित राजकुमारी को 310 वोट ही पड़े। विपिन कुमार 65 वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने में सफल हुए हैं। 13 वोट अवैध घोषित किए गए। बताैर आजाद उम्मीदवार अजय भारद्वाज काे महज 11 वाेट पड़े। दूसरी ओर विवि कोर्ट के लिए भाजपा समर्थित बुद्धि राम को 357 वोट मिले तथा लेफ्ट समर्थित रामलाल को 322 वोट मिले। इस पद पर कड़ा मुकाबला रहा। भाजपा समर्थित प्रत्याशी 35 वोटों से जीत दर्ज करने में सफल रहे। 15 वाेट अवैध घोषित किए गए।
90 फीसदी से अधिक हुआ मतदान
ईसी व कोर्ट चुनाव में कुल मतों में से 709 वोट पड़े हैं। जिसमें से महज 28 वोट इनवैलिड पाए गए। सुबह 11 बजे से ही एचपीयू के सभागार में बनाए गए पोलिंग बूथ में कर्मचारियों की कतारें वोट डालने के लिए लगी रही। इस बार साेशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया गया। दोपहर 12 बजे तक मात्र 20 फीसदी ही वोटिंग हुई। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे तक यह आंकड़ा 70 फीसदी पहुंच गया। आखिरी आधे घंटे में अच्छी खासी वोटिंग हुई। वोटिंग 90 फीसदी से अधिक रही। पिछले वर्ष की तुलना करें तो इस वर्ष अच्छी खासी वोटिंग हुई है। कर्मचारियों ने वोट डालने में काफी उत्साह दिखाया।
कांग्रेस-लेफ्ट समर्थित प्रत्याशी नहीं बचा पाए इस बार काेर्ट सीट
इस बार लेफ्ट और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी काेर्ट सीट भी नहीं बचा पाए हैं। पिछले वर्ष काेर्ट पद पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ललित कुमार जीते थे। इस बार कांग्रेस समर्थित कर्मचारियों को हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि पूर्व ईसी सदस्य चौधरी वरयाम सिंह बैंस के बाद कोई भी प्रत्याशी अभी तक हैट्रिक नहीं लगा पाए हैं। पिछले दो वर्षों से भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का ईसी में कब्जा है।
भाजपा समर्थितों काे मिला सत्ता का फायदा
प्रदेश भाजपा की सरकार होने के चलते भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को सत्ता में होने का फायदा मिला है। इस बार कांग्रेस और लेफ्ट समर्थित प्रत्याशियों ने पहले ही निर्णय ले लिया था कि वह एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। इसके बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। पिछली बार कांग्रेस समर्थित ईसी व कोर्ट में जीते थे। पिछली बार तिकाेना मुकाबला था।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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