इस बार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के लिए राेटेशन नहीं बल्कि राेस्टर प्रणाली काे लागू किया जाएगा। दस साल पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दाैरान सरकार ने इस प्रणाली काे अपनाते हुए पंचायताें के चुनाव करवाए थे। 2015 के चुनाव राेटेशन आधार पर करवाए गए थे। राेस्टर प्रणाली के लागू हाेने के बाद उन लाेगाें काे बड़ा झटका लगने वाला है जाे इस बार पंचायताें के चुनाव लड़ने का सपना देख रहे है।
राेस्टर प्रणाली लागू हाेने के बाद कई लाेग चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं हाे सकेंगे। प्रदेश में 230 नई पंचायताें के बनने के बाद सभी पंचायताें में शून्य से राेस्टर काे लागू किए जाएगा और नए सिरे से चुनाव की प्रकिया हाेगी। अभी तक पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग यही समझ रहे हैं कि रोटेशन में उनका नंबर आ जाएगा व वे चुनाव के लिए इलिजिबल हो जाएंगे लेकिन अब ऐसा नहीं हाेगा।
चुनाव में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित
पंचायतों के चुनाव में सरकार ने महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण तय किया है जाे इस बार भी जारी रहेगा। इसके अनुसार महिलाओं को चुनाव में सीटें मिलेंगी लेकिन जो पंचायतें पहले एससी या एसटी के लिए आरक्षित थीं वो इस बार नहीं रहेंगी। यहां पर नए सिरे से फाॅर्मूला लगाया जाएगा। हालांकि वर्ष 2011 की जनगणना ही आधार बनेगी मगर रोटेशन नहीं की जाएगी।
अगर कोई महिला आरक्षित पंचायत पिछली बार थी तो वो इस बार बदल सकती है या सरकार उसे वैसे ही रहने भी दे सकती है। पंचायती राज में जो फाॅर्मूला इस संबंध में लगाया जाता है वो जनसंख्या के आधार पर होता है और उसे नए सिरे से इस बार के पंचायती राज चुनाव में इस्तेमाल किया जाएगा। एससी व एसटी की जनसंख्या को भी इस बार देखा जाएगा कि उसमें कितनी बढ़ोतरी हुई है या वहां पर जनरल की आबादी बढ़ी है। इस फार्मूले पर काम शुरू कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पंचायती राज विभाग को इस संबंध में सरकार की ओर से निर्देश जारी किए जा चुके हंै।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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