व्यावसायिक शिक्षा को अकादमिक शिक्षा की बराबरी पर लाना शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को खत्म कर डालेगा। यह कदम आइंस्टीन के शब्दों में एक साक्षर मशीन का निर्माण करने का ही कार्य करेगा। यह बातें बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति किसके हित में विषय पर आयोजित आॅनलाइन सेमिनार में अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति के राष्ट्रीय सचिव ई. देवाशीष राय ने शिक्षाविद, शिक्षाप्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति, शिक्षा को पूंजीपतियों के हाथों बेचने का दस्तावेज है।
यह गरीबों-वंचितांे को शिक्षा से वंचित रखने की गहरी साजिश है। सरकार जीडीपी के 6% तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की बात कर रही है। लेकिन यह सर्वविदित है कि 2014 से लगातार शिक्षा में जीडीपी की हिस्सेदारी घट रही है। यहां तक कि ई-लर्निंग की परियोजना के लिए बजट आवंटन 2019 -20 की तुलना में 2020-21 में और भी कम हो गया है। इसके विपरीत सार्वजनिक निवेश के स्थान पर निजी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार शीर्ष 100 विदेशी शिक्षण संस्थानों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति देगी, जो कि आग में घी का काम करेगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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