राजनीतिक आकाओं की दर पर टिकटार्थियों की कतारें तो चुनावी क्षेत्र में कयासों का दौर। शीट शेयरिंग पर मचे घमासान के बीच विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भी उम्मीदवारी तय नहीं हो पा रही। जिले की आधा दर्जन से अधिक सीटों पर तस्वीर धुंधली है। कहीं एनडीए तो किसी क्षेत्र में महागठबंधन से उमीदवारवारी को लेकर सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं।
इस मामले में कांटी विधानसभा क्षेत्र अभी सबसे हॉट बना हुआ है। पिछले चुनाव में निर्दलीय अशोक चौधरी और एनडीए से मांझी के हम पार्टी से उम्मीदवार रहे पूर्व विधायक अजीत कुमार के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। चौधरी ने बाजी मारी, लेकिन जदयू में आने के बाद अब वे सकरा की ओर रुख कर चुके हैं। चुनाव में हार के बाद अजीत कुमार ने हम का साथ छोड़ दिया। अभी वे पत्ता नहीं खोल रहे हैं। वैसे प्रमुख गठबंधनों में दावेदारी दर्जन से ऊपर है।
शीट शेयरिंग का मामला सुलझने के बाद भी उम्मीदवारी को लेकर घमासान मचना तय है। शहरी क्षेत्र से सटे होने के कारण राजनीतिक गलियारों से निकल अब गांव शहर के चौक-चौराहे पर भी यह चर्चा होने लगी है कि आखिर किसकी उम्मीदवारी होगी? गायघाट, कुढ़नी, पारू, मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन की तो मीनापुर, साहेबगंज में एनडीए की तस्वीर भी कमोबेश धुंधली ही है।
विधायक माहेश्वर यादव के जदयू में जाने से गायघाट में महागठबंधन से अब कोई न कोई नए प्रत्याशी ही मैदान में आएगा। इस उम्मीद में सिर्फ राजद से ही आधा दर्जन दावेदार टिकट पाने के लिए लगातार मुजफ्फरपुर से पटना दौड़ भाग कर रहे हैं। वीआईपी की भी नजर गायघाट और मुजफ्फरपुर विधानसभा पर है।
मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र से तो महागठबंधन के सभी घटक दल जोर आजमाइश में लगे हैं। राजद, कांग्रेस, वीआईपी तीनों दलों के दावेदार पार्टी नेतृत्व से संपर्क साधने में जुटे हैं। बताया जाता है कि महागठबंधन की तस्वीर साफ न देख भाजपा के भी कुछ नेता दल बदल कर राजद से टिकट पाने की जुगत में लगे हैं। जदयू सकरा, गायघाट तो अपने खाते में मानकर चल रही है, लेकिन दावा राजद के कब्जे वाले अन्य सीटों पर भी है। पार्टी नेताओं की मानें तो कम से कम 5 से 6 सीटों पर उम्मीदवारी होगी। साफ है यहां भी खींचतान कम नहीं है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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