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पहली बार लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी आधार, 15 हजार से ज्यादा लोगो से लिया फीडबैक

पहली बार शहर में मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में आम लोगो की सामाजिक आर्थिक स्थिति का भी आंकलन किया जा रहा है। इसके जरिए शहर में भविष्य के लिहाज से किस तरह की उन्नत सुविधाओं की जरूरत पड़ेगी इसका भी खाका मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। अक्टूबर के अंत तक लैंड यूज की मौजूदा स्थिति को लेकर 2 हजार सैटेलाइट मैप के साथ शहर के 506 वर्ग किलोमीटर की स्थिति का भौतिक सत्यापन हो जाएगा। फिजिकल वेरीफिकेशन के बाद सारे नक्शे लैंड यूज के 216 से ज्यादा बिंदुओ के आधार पर हैदराबाद भेजे जाएंगे। वहां इन नक्शों में आज की स्थिति में जमीन के विभिन्न इस्तेमाल को दर्शाते हुए नये सैटेलाइट नक्शे वापस रायपुर आएंगे।
इसके बाद विशेषज्ञों की टीमों, जनप्रतिनिधियों और तमाम पक्षों के मुताबिक शहर का एक कंपोजिट मास्टर प्लान बनाया जाएगा। दरअसल, आज से कुछ साल पहले तक रायपुर में सेंट्रलाइज मार्केट का चलन था। यानी कुछ विशेष बाजारों से लोग खरीददारी करते थे। लेकिन बाद में मार्केट विकेंद्रित होने लगे। लिहाजा पुराने मास्टर मार्केट में दर्शाए गये रिहायशी इलाके अब वाणिज्यिक और व्यवसायिक गतिविधियों का हिस्सा बन गये हैं। तकनीकी और जमीनी तौर पर पुराने मास्टर प्लान की वर्तमान स्थितियों में क्या क्या बदलाव इस तरह के हुए हैं उनका व्यापक ब्यौरा भी बन रहा है।
करीब 2 करोड़ की लागत में शहर के 506 वर्ग किलोमीटर के नये मास्टर प्लान में रायपुर नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा 178 वर्ग किलोमीटर का है। जबकि शेष 328 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा शहर के उपनगरीय और आसपास की बसाहट का है। मास्टर प्लान के लिए पहली बार जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल भी हो रहा है। इसके लिए 2 हजार से ज्यादा सैटेलाइट नक्शे हैदराबाद भेजे जाएंगे हैं। हर नक्शे में आधा किलोमीटर गुणा आधा किलोमीटर क्षेत्रफल को कवर किया गया है। पहली बार मास्टर प्लान में केवल जमीन के टुकडों को लेकर ही नहीं बल्कि इनके ऊपर रहने बसने वाले इंसानों को लेकर भी समग्र मास्टर प्लान कि कवायद हो रही है। इसके तहत शहर कि करीब 5 फीसदी यानी 15 हजार घरों में अलग अलग सामाजिक आर्थिक स्थिति व वर्ग के हिसाब से 50 से ज्यादा सवालों के जरिए रायशुमारी की प्रक्रिया कर ली गयी है। इसमें विभिन्न आय वर्ग की सामाजिक आर्थिक स्थिति के हिसाब से उनकी जरूरतों का आंकलन किया जाएगा। मास्टर प्लान बनाने में इंजीनियरों के साथ समाजशास्त्री और अर्थशास्त्रियों की भी अहम भूमिका रहेगी। 15 हजार परिवारों से सर्वे में जाना गया कि वो शहर में किस तरह रहते हैं। घर कितने कमरे का है, पक्का है या कच्चा। सप्ताह में कितने दिन काम पर जाते हैं।

कार्यस्थल तक जाने के लिए किस साधन का इस्तेमाल करते हैं। महीने या हफ्ते में परिवार के साथ शहर के किन-किन उद्यानों तालाब में घूमने फिरने जाते हैं। चौपाटी होटल रेस्टारेंट में कितनी बार खाना खाते हैं। किन बाजारों से खरीदी करते हैं। इसमें शहर आकर काम करने वाले अप डाउनर्स से भी राय ली गयी है ताकि भविष्य में मेट्रो जैसे रूट किन-किन उपनगरों तक प्राथमिकता से बनाए जाएं इसका अंदाजा लग सके।


नया मास्टर प्लान ये सब पहली बार

  • 506 वर्गकिलोमीटर की प्लानिंग
  • 15 हजार परिवारों का फीडबैक
  • 216 तरह के लैंड यूज
  • 2000 से ज्यादा नक्शे
  • बेस मैप भी सैटेलाइट


"लैंड यूज का भौतिक सत्यापन अक्टूबर से पहले खत्म कर लिया जाएगा, इसके बाद लैंड यूज की वर्तमान स्थिति के आधार पर हमें 2 हजार से ज्यादा नये सैटेलाइट नक्शे मिलेंगे। जो वर्तमान स्थिति को 216 पैमाने पर बताएंगे इस बेस मैप से मास्टर प्लान की प्रक्रिया अगले चरण में जाएगी।"
-योगेश कडू, नोडल अधिकारी, रायपुर मास्टर प्लान

एक हजार से ज्यादा नक्शे का फील्ड सर्वे हो चुका
20 साल की बड़ी प्लानिंग के मद्देनजर तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान में अब तक एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट नक्शों के जरिए लैंड यूज के भौतिक स्थिति का सत्यापन हो गया है। हैदराबाद जाने के बाद भौतिक स्थिति के आधार पर लैंड यूज का बेस मैप मिलेगा। ये बेस मैप ही 20 साल की उस नयी प्लानिंग का आधार बनेगा जो 40 लाख की बड़ी आबादी के रहने के लायक शहर को बनाएगी।



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सर्व करते कर्मी।


Source From
RACHNA SAROVAR
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