सेब के दाम पहले बागबानों को अच्छे मिल रहे थे। पहले जहां बी ग्रेड का सेब भी 1600 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से बिक रहा था, वहीं इसके दाम एक चौथाई से कम रह गए हैं। यह सेब अब 400 रुपए पेटी भी मुश्किल से बिक रहा है। बागबान सेबों के दामों में आई गिरावट से चिंतित हैं। सेब के दाम तब गिरे हैं जबकि हिमाचल में अबकी बार सेब का उत्पादन बहुत कम हैं।
बागबान सेब के दामों के गिरने के लिए लदानियों और आढ़तियों के गठजोड़ को मान रहे हैं। बागबानों का कहना है कि लदानियों, आढ़तियों के साथ-साथ हिमाचल में सीधे बागबानों से सेब खरीदने वाली कुछ कंपनियों का भी इसमें हाथ रहा है। इस तरह बागबानों को सेब औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ा है। इस बार के सेब सीजन में अलग तरह की स्थिति देखने काे मिली है।
जहां लाेअर बेल्ट के बागबानाें काे सेब के अच्छे दाम मिले हैं, वहीं अब ऊंचाई वाले क्षेत्राें के बागबानाें काे पेटी का खर्च निकालना भी मुश्किल हाे रहा है। किसान संघर्ष समिति का आराेप है कि कंपनियाें और आढ़तियाें की मिली भगत के कारण ये स्थिति आई है। वहीं, दूसरी ओर कश्मीर और उत्तराखंड के ऊपरी क्षेत्राें का सेब की मंडियों में दस्तक के साथ ही प्रदेश की मंडियां में दाम गिर गए हैं। दिल्ली और मुंबई की बड़ी मंडियों में कश्मीर के सेब आने से ज्यादातर लदानी उन्हें खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
इस बार लाेअर बेल्ट फायदे में, हाइट का सेब बिक रहा कम दाम में
इस बार लाेअर बेल्ट के बागबानाें काे ताे फायदा मिला है, लेकिन हाईट के बागबानाें काे नुकसान झेलना पड़ा है। मार्केट में फसल कम थी, इसके बावजूद भी सेब के दाम में इन दिनाें काेई बढ़ाेतरी नहीं हुई है। काेविड के चलते भी बाहरी राज्याें से लदानी काफी कम हिमाचल की मंडियाें में आ रहे हैं। ढ़ली और पराला मंडी में बागबानाें काे वाे दाम नहीं मिल रहे हैं, जाे अगस्त में सेब सीजन के शुरू हाेते ही मिले थे।
पराला सब्जी मंडी में सेब ट्रेडर का काम करने वाले अतुल राजटा का कहना है कि बी ग्रेड का सेब के रेट में ताे काफी गिरावट आई है। जबकि ए ग्रेड का सेब 2500 तक बिकना चाहिए थे, ये 1100 से लेकर 1500 तक ही बिक पा रहा है।
सरकार हस्तक्षेप नहीं कर रही, मार्केट में आढ़तियाें और कंपनियाें का गठजाेड़
संजय चाैहान किसान संघर्ष समिति के महासचिव संजय चाैहान का कहना है कि सरकार का काेई हस्तक्षेप मंडियाें में नहीं हैं। इसलिए बागबानाें से धाेखा हाे रहा है। मार्केट में आढ़तियाें और कंपनियाें का गठजाेड़ है। वे बागबानाें से कम दाम में फसल खरीद रहे हैं। अब खरीदार कम कीमत में बागबानाें से सेब ले रहा है। उनका कहना है कि अब जाे किसान विराेधी बिल लाए गए हैं, उससे और ज्यादा लूट हाेगी।

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Source From
RACHNA SAROVAR
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