(ब्रज किशोर दूबे) राज्य में सबसे अधिक मतदाता वाले दीघा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी अभी मद्धिम है। 2008 के परिसीमन के बाद 2010 के चुनाव में एनडीए से जदयू के टिकट पर पूनम देवी विधायक बनी थी। लेकिन, 2015 में जदयू के अलग होने के बाद भाजपा के टिकट से डॉ. संजीव चौरसिया विधायक बने।
जदयू से मैदान में खड़े होने की तैयारी में जुटे नेताओं का मानना है कि परिसीमन के बाद जदयू को टिकट मिला था। इस बार भी सीट पर जदयू का ही दावा बनता है। लेकिन, भाजपा नेताओं का कहना है कि सीटिंग विधायक भाजपा के होने के कारण दीघा सीट भाजपा के पास ही रहनी चाहिए।
डॉ. चौरसिया ने क्षेत्र में प्रचार शुरू कर दिया है। वे टिकट मिलने को लेकर आश्वस्त हैं। कहते हैं पांच सालों तक लोगों की सेवा की है। सेवा, संघर्ष और क्षेत्र की जनता के प्रति समर्पण ही हमारी पूंजी है। सीट जदयू के खाते में गई तो दावेदार प्रो. रणवीर नंदन, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद सहित कई अन्य हैं। उधर, महागठबंधन में कांग्रेस और भाकपा-माले की भी अपनी-अपनी दावेदारी है।
जलजमाव-जाम से इलाके के लोगों को अब तक नहीं मिली निजात
चुनाव आए-गए लेकिन दीघा की जनता की पुरानी मांग जस की तस रह गई। पूरा क्षेत्र मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पुराने दीघा इलाके से लेकर नई कॉलोनियों में शामिल आशियाना नगर, पाटलिपुत्र, राजीव नगर, चितकोहरा, गर्दनीबाग, अनीसाबाद, मैनपुरा, नेहरू नगर, राजाबाजार, जगदेव पथ, पटेल नगर आदि जलजमाव से परेशान हैं।
मुख्य सड़कों को छोड़ कर गलियों की सड़कें दुरुस्त नहीं है। इलाके में बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए मैदान, सार्वजनिक शौचालय, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, बस-ऑटो स्टैंड आबादी के हिसाब से नहीं है। जाम आम है। 40 साल पुराने अधिग्रहण से मुक्ति की मांग जस की तस है। दीघा विधानसभा क्षेत्र के कुल 4,54,340 वोटरों में करीब 50 हजार से अधिक वोटर दीघा के 1024.52 एकड़ जमीन पर घर बनाकर रहने वाले हैं। लिहाजा मुद्दों का मोर्चा बदला नहीं है।
वोट का गणित
दीघा विधानसभा क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं की संख्या आधा से अधिक है। यानी, ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, कायस्थ मतदाता करीब 2 लाख हैं लेकिन यादव, कोयरी, कुर्मी, पासवान, वैश्य, मुसलमान की संख्या जीत-हार में अहम रोल निभाती रही है। महादलित वोटरों की संख्या करीब 25 हजार है।
यहां जाम की समस्या
पटना की पॉश कॉलोनी में शुमार पाटलिपुत्र कॉलोनी के निवासी सेवानिवृत आईएएस वीएस दूबे बताते हैं कि परिसीमन के बाद दीघा विधानसभा क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया। लेकिन, कच्ची-नाली और टूटी सड़कों में बदलाव नहीं आया। कॉमर्शियल गतिविधि से जाम की समस्या रहती है।
सीट का इतिहास
2008 में परिसीमन के बाद दीघा विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। 2010 में पहला चुनाव हुआ था। इसमें एनडीए उम्मीदवार पूनम देवी जदयू के टिकट से विधायक बनी थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू के महागठबंधन में शामिल होने के बाद जदयू के टिकट पर राजीव रंजन प्रसाद ने चुनाव लड़े थे। लेकिन एनडीए समर्थित भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने वाले डॉ. संजीव चौरसिया ने राजीव रंजन प्रसाद को हराया था।

इस सीट पर दूसरे चरण में होना है मतदान
दीघा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव 3 नवंबर को होना है। इसकी अधिसूचना 9 अक्टूबर को जारी होगी। इसी दिन से नामांकन शुरू हो जाएगा। नामांकन करने की अंतिम तारीख 16 अक्टूबर है। 19 अक्टूबर तक नाम वापस लिया जाएगा। 3 नवम्बर को मतदान होगा। 10 नम्बर को मतगणना होगी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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