चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फिर बड़ा हमला बोला। कहा कि बिहार की जनता उन्हें फिर से मुख्यमंत्री नहीं देखना चाहती। वह नहीं चाहती कि नीतीश फिर से सत्ता में लौटें। मेरा भी दृढ़ विश्वास है कि उन्हें फिर से मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। यदि मेरे कारण वे फिर से बिहार के मुख्यमंत्री होते तो मैं खुद को दोषी मानता।
मैं इस ग्लानि में ही रहता कि मेरे कारण मेरा प्रदेश फिर से पांच वर्षों तक झेलता। मेरा मानना है कि लालू प्रसाद के समय से बड़ा एंटी इनकंबेंसी फैक्टर नीतीश कुमार के साथ है। जनता उनसे नाराज है और उनके कार्यों से असंतुष्ट। आम लोगों तक विकास और कल्याणकारी योजनाएं नहीं पहुंची हैं। डबल इंजन की सरकार का बिहार को क्या फायदा जब आम आदमी तक कुछ पहुंच ही नहीं रहा।
शाह-नड्डा से कहा था- मुझे नीतीश के खिलाफ स्वतंत्र लड़ने दें :चिराग ने कहा कि उन्होंने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुलाकात के दौरान अनुरोध किया था कि वे मुझे नीतीश के खिलाफ लड़ने को स्वतंत्र करें क्योंकि मैं उनके नेतृत्व में इनके एजेंडे पर चुनाव में नहीं जाना चाहता।
मेरी अन्तरात्मा इसकी इजाजत नहीं देता। फिर साथ चुनाव लड़ने का क्या औचित्य? ऐसे नीतीश कुमार से उन्हें बड़ी उम्मीदें थी, लेकिन वे विफल रहे। विकास कहीं जमीन पर नहीं दिखता। आम लोगों की इसमें हिस्सेदारी भी नहीं। लोग परेशान हैं। लोकतंत्र में जनता के पास विकल्प होने चाहिए। अधिक विकल्प होने से काम करने की चुनौती रहती है।
तेजस्वी छोटा भाई, शुभकामनाएं
चिराग ने कहा कि उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव को अपना छोटा भाई बताया है। उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं। पर यह भी कहा है कि भविष्य तय करेगा कि कौन किस भूमिका में होगा। अभी इस बारे में कुछ बताना ठीक नहीं है। जनता अपनी पसंद का नेता चुनती है।
जनार्दन का टिकट बेटे को मिला
अमरपुर के सीटिंग विधायक जनार्दन मांझी का टिकट उनके बेटे जयंत राज को मिला। मांझी ने अपने लिए टिकट नहीं मिलने की वजह बताई-’मुझ पर एक मुकदमा है। उम्र भी हो गई है।’ बेटे का कहना था कि यह कोई बड़ा केस नहीं है। सक्रिय राजनीति में नेता पर ऐसे मुकदमे होते रहते हैं।
जदयू नेता बोले- हमारी दोस्त भाजपा, नीतीश हमारे नेता, सरकार तो हमारी ही बनेगी
जदयू के उम्मीदवारों को लोजपा या चिराग पासवान के कदम की बिल्कुल परवाह नहीं है। कमोबेश सबने कहा कि लोजपा के अलग चुनाव लड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शुरू से हमारा संबंध भाजपा से है। सबसे बड़ी बात कि नीतीश कुमार हमारे नेता हैं। सबका दावा रहा-हम जीतकर आ रहे हैं। इस बार भी हमारी ही सरकार बनेगी।
प्लीज, अभी कुछ बात मत पूछिए; आते हैं तो आपसे बात करते हैं
सभी प्रत्याशियों को फोन करके सिंबल ले जाने के लिए मुख्यमंत्री आवास बुलाया गया था। अंतिम समय में कुछ भी गड़बड़ा न जाए, उम्मीदवारों ने इसका पूरा ख्याल रखा। मुख्यमंत्री आवास में जाने के पहले उन्होंने मीडिया से कुछ भी बोलने से बिल्कुल परहेज रखा। मनोरमा देवी (अतरी) पर जब बोलने के दबाव बढ़ा, तो उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा- ‘प्लीज, अभी कुछ मत पूछिए; आते हैं तो बात करते हैं।’ यह लाइन लगभग सबकी थी। वैसे निकलते वक्त भी कई उम्मीदवारों ने खुद को पूरी तरह चुप रखा।
बाहर आते ही फूलमाला, हल्का-फुल्का जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए
कई उम्मीदवार के साथ कुछ समर्थक भी थे। उम्मीदवार के मुस्कुराते हुए बाहर आते ही उनको फूलमाला से लाद देते थे। जिंदाबाद के हल्के-फुल्के नारे भी। मुख्यमंत्री आवास में जाते वक्त चेहरे पर हल्का तनाव सा दिखता था। बाहर निकलने पर चेहरा ही बता देता था कि सिंबल मिल गया।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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