पांच साल से एंबुलेंस रोड बनाने की अनुमति देने की मांग कर रहे मज्याठ के लोगों ने वीरवार को टुटू में रेलवे स्टेशन पर धरना दिया। मज्याठ के सैकड़ों लोग पार्षद दिवाकर शर्मा की अगुवाई में सुबह करीब पौने आठ बजे रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे और यहीं रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर बैठ गए।
लोगों ने रेलवे प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए सुबह रेलवे के लोकल अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को मनाने की कोशिश की। मगर लोगों ने साफ किया कि जब तक रेलवे ओवरब्रिज बनाने की अनुमति नहीं दी जाती वे धरना जारी रखेंगे।
इसके बाद शाम को रेलवे अधिकारियों ने पार्षद दिवाकर शर्मा व अन्य प्रतिनिधियों से बात कर उनके साथ 7 अक्टूबर को एक बैठक तय की। इस बैठक में एंबुलेंस मार्ग के लिए ओवरब्रिज की लिखित अनुमति देने का भरोसा दिया गया है। इसके बाद फिलहाल लोगों ने धरना खत्म कर दिया है।
टुटू पावर हाउस से होकर जाने वाले सड़क मार्ग से मज्याठ वार्ड को जोड़ा जाना है। इसके लिए स्टेशन के पास से एक ओवरब्रिज बनाया जाना है। ओवरब्रिज बनाने की अनुमति रेलवे प्रशासन नहीं दे रहा। हालांकि मज्याठ से रेलवे ट्रैक तक एंबुलेंस मार्ग का काम अधिकतर कार्य पूरा किया जा चुका है, मगर बीच में रेलवे ट्रैक के कारण यह मैन सड़क से नहीं जुड़ पा रही है।
लोगों का कहना है कि कई बार इस मामले को रेलवे से उठाया गया है, मगर रेलवे प्रबंधन का रवैया नकारात्मक रहा है। ऐसे में मजबूर होकर उनको रेलवे रोको आंदोलन शुरू करना पड़ रहा है। धरने के कारण शिमला-कालका मार्ग पर चलने वाली वर्कमेन स्पेशल ट्रेन नहीं चल पाई। यह ट्रेन सुबह शिमला से 8.30 बजे कालका के लिए चलती है। इसमें रेलवे का स्टाफ सफर करता है और सामान की सप्लाई भी इससे होती है।
कई सालों से नहीं बन पाई यहां एंबुलेंस रोडः विजय
प्रदर्शन में पहुंचे विजय पाठक कहते हैं कि पीएमओ के साथ-साथ रेलवे मंत्रालय से इस मामले को कई बार उठाया गया है। हालांकि पीयूष गोयल ने रेलवे मंत्री रहते हुए एंबुलेंस रोड के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे थी, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही। इससे लोगों में भारी रोष है।
गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों को मुश्किल
नीलम नीलम शर्मा कहती हैं कि सड़क न होने से गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को पीठ उठाकर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। बुजुर्ग और महिलाओं को भी इस कारण भारी दिक्कतें आ रही हैं।
शहर में रहकर भी सड़क की सुविधा नहींः शीला शर्मा
शीला शर्मा कहती हैं कि शहर का हिस्सा होने के बावजूद मज्याठ में आज तक सड़क नहीं बन पाई। ऐसे में लोगों को घर बनाने का मैटेरियल और अन्य सामान मजदूरों से उठवाना पड़ रहा है जो कि काफी मंहगा पड़ रहा है। महिलाओं व बच्चों को भी सड़क न होने से दिक्कतें हो रही हैं।
7 अक्टूबर को बैठक में लिखित अनुमति देने को रेलवे तैयारः दिवाकर
रेल रोको आंदोलन की अगुवाई कर रहे स्थानीय पार्षद दिवाकर शर्मा का कहना है कि मज्याठ में एंबुलेंस मार्ग का अधिकतर काम पूरा हो चुका है, सिर्फ इसको मैन सड़क से जोड़ा जाना है। इसके लिए ओवरब्रिज रेलवे ट्रैक के ऊपर बनना है, मगर इसके लिए रेलवे अनुमति नहीं दे रहा।
अगर यह एंबुलेंस मार्ग बनता है तो इससे करीब चार हजार की आबादी को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने 7 अक्टूबर को उनको बैठक में बुलाया है, जिसमें ओवरब्रिज की लिखित अनुमति देने का आश्वासन दिया है। इसके चलते फिलहाल आंदोलन टाल दिया है।
जुब्बल काेटखाई में 21 बागबानाें के साथ हुई ठगी पर कार्रवाई करे सरकार: सभा
हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर और शिमला जिलाध्यक्ष एवं राज्य वित्त सचिव सत्यवान पुंडीर ने कहा कि जुब्बल काेटखाई क्षेत्र के 21 बागबानाें ने 18 सितंबर काे जुब्बल थाने में तीन आढ़तियाें के खिलाफ 39 लाख रुपयाें की धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज करवाई है।
उन्हाेंने कहा कि एक ओर कोरोना महामारी के चलते पूरी अर्थव्यवस्था ही चपेट में आ गई है, ऊपर से सालभर बगीचों में काम करने के बाद इस प्रकार की धोखधड़ी ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।
उन्हाेंने कहा कि सभा जो पिछले दो वर्षो से बागबानों के साथ की जा रही इस प्रकार की धोखाधड़ी के खिलाफ सड़क से विधानसभा तक लगातार आवाज उठाती आ रही है, ने हजारों बागबानों की शिकायतें एसआईटी के पास आज दर्ज करवाई हैं जिनमें से कुछ पर ही कार्रवाई हो पाई है।
उन्हाेंने कहा कि इस संबंध में किसान सभा सरकार से मांग करती है कि जुब्बल थाने में दर्ज की गई 21 बागबानों की प्राथमिकी पर तुरंत प्रभाव से कड़ा संज्ञान लेते हुए तीन कमीशन एजेंटों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए बागबानाें की राशि का भुगतान करवाया जाए।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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