असगर खान | छत्तीसगढ़ चैंबर के अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा के तीन साल का कार्यकाल दिसंबर में पूरा हो रहा है। दो माह बाकी हैं, इसलिए चैंबर में लाॅबिंग अब तेज होने लगी है। इस बीच, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत मौजूदा चैंबर अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा दोबारा चुनाव लड़ने से पीछे हट गए हैं। उन्होंने भास्कर से कहा कि अब चैंबर का कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे, और न ही कार्यकाल बढ़ाएंगे। उनकी इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि 19 दिसंबर को अध्यक्ष के हटते ही चैंबर की पूरी कार्यकारिणी शून्य हो सकती है। इधर, बरलोटा के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान और कार्यकारिणी विलीन होने के संकट पर विचार के लिए 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजे चैंबर की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुला ली गई है।
कार्यकाल पूरा होने के तुरंत बाद चैंबर के चुनाव होंगे या नहीं, इस बात को लेकर भी संगठन में कई तरह की राय आ रही हैं। हालांकि बड़ा वर्ग कोरोना की वजह से फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को टालने की जुगत में लग गया है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी इस बात पर विचार किया जा सकता है कि कोरोना की वजह से चुनाव टाला जाए या नहीं। अगर चुनाव नहीं टला और बरलोटा कार्यकाल पूरा होने के बाद हट गए, तो इस स्थिति में चुनाव होने तक चैंबर का संचालन करने के लिए किस तरह नए पदाधिकारियों को नियुक्त किया जाए।
कारोबारी चुनाव में भी कांग्रेस भाजपा के टकराव के आसार
चैंबर चुनाव की हलचल के साथ ही इस बार चुनाव लड़ने वाले पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं। पिछली बार चुनाव लड़ चुके यूएन अग्रवाल और अमर गिदवानी ने राज्य के कई जिलों का दौरा शुरू कर दिया है। श्रीचंद सुंदरानी के व्यापारी एकता पैनल से योगेश अग्रवाल, लालचंद गुलवानी, ललित जैसिंघ, चंदर विधानी, राजेंद्र जग्गी, विनय बजाज और रमेश गांधी ने दावेदारी शुरू कर दी है। जग्गी अभी वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं। ऐसे में सत्ता और विपक्ष की भी दावेदारी तेज हो रही है। कांग्रेस ने किसी उम्मीदवार का समर्थन किया तो भाजपा का भी मैदान में उतरना तय है। भाजपा के रायपुर जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी व्यापारी एकता पैनल के प्रमुख लोगों में से एक हैं जिनकी रायशुमारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इस बार के चैंबर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का खुलकर आमने-सामने होना तय है।
चुनाव होने या नहीं होने पर अलग-अलग राय
ऐन कोरोना के समय बुलाई गई इस बैठक का विरोध भी शुरू हो गया है। चैंबर के कई पदाधिकारियों का कहना है कि व्यापारी अभी बाजार की तंगी को झेल रहा है। ऐसे समय में चुनाव करवाकर उसे और परेशान नहीं किया जा सकता है। हालांकि कई पदाधिकारियों का यह तर्क है कि कोरोना की वजह से बाजार खाली हैं। कारोबार में भी मंदी है। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी चल रही है। इसलिए ऐसे समय में चुनाव का काम आसानी से निपटाया जा सकता है। चुनाव करवाने के लिए शासकीय कर्मचारी भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। जनवरी में किसी भी तरह का खास सीजन नहीं है। इसलिए इसी महीने चुनाव का काम पूरा करवा लेना चाहिए। इधर, दूसरी ओर छत्तीसगढ़ चैंबर के चुनाव में प्रदेश के बड़े व्यापारिक संगठन कैट पदाधिकारियों ने भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है। चैंबर के कई व्यापारी नेता भी कैट में बड़े पदों पर है। इस वजह से भी चुनाव रोमांचक होने लगा है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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