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महागठबंधन में राजद के सबसे अधिक उम्मीदवार; इधर, एनडीए में भाजपा से ज्यादा सीटें लड़ेगा जदयू

(गुंजेश) पार्टियों के बीच सीट बंटवारे का जो फार्मूला बन रहा है उसके हिसाब से पहले चरण की 71 सीटों में सर्वाधिक 50 पर राजद के प्रत्याशी होंगे। महागठबंधन के घटक दलों में तीन ही इस चरण में एनडीए से दो-दो हाथ करते दिखेंगे। भाकपा-माले 8 और कांग्रेस के खाते में जाने वाली 12 (संभावित) सीटों में से 9 उसके पास 2015 के चुनाव में भी थीं।

एनडीए में भाजपा और जदयू के बीच सीट बंटवारे का फार्मूला 40:31 से होने की उम्मीद है। जदयू की सीटों में ‘हम’ के खाते की 6 सीटें शामिल हैं। भाकपा-माले के लिए राजद ने अपनी चार सीटिंग सीटें छोड़ी हैं। इस चरण में राजद के दो विधायक छोड़ चुके हैं इस हिसाब से सर्वाधिक नए चेहरे मैदान में इस बार राजद के ही होंगे।

यहां बता दें कि पहले चरण की 71 सीटों पर नामांकन का दौर जारी है। बंटवारे में महागठबंधन के घटक 144 (राजद), 70 (कांग्रेस), 19 (भाकपा-माले), 6 (भाकपा) और 4 (माकपा) को मिली सीटों में पहले चरण में राजद, कांग्रेस और भाकपा-माले की ताकत की ही परीक्षा होगी।

इस चरण में भाकपा-माकपा के हिस्से की सीटें नहीं हैं। जिस इलाके से 17वीं विधानसभा का चुनाव शुरू हो रहा है, लोकसभा चुनाव में वहीं सबसे कड़ा संघर्ष महागठबंधन और एनडीए के बीच हुआ था। हालांकि तब महागठबंधन लोकसभा की एक भी सीट नहीं जीत पाया था।
पहले चरण में एनडीए की चुनौती
पहले चरण में जदयू की 22 सीटिंग विधायक हैं। कांग्रेस के दो (बरबीघा, गोविंदुपर) और राजद के दो (सासाराम और पालीगंज) विधायक के जदयू में शामिल होने से तकनीकी तौर पर जदयू के सीटिंग विधायकों की संख्या 26 हो गई है। इतनी सीटें तो पार्टी लड़ेगी ही। कुटुंबा और सिकंदरा पर भी जदयू का स्वाभाविक दावा है, क्योंकि दोनों सीटें उसने 2015 में कांग्रेस के लिए छोड़ी थी।

इस हिसाब से जदयू की सीटों की संख्या 28 हो जाती है। बांका, कटोरिया, मुंगेर, मसौढ़ी, अरवल, मखदुमपुर, इमामगंज व बाराचट्‌टी भी जदयू के पाले में ही जाएगी। इस हिसाब से देखें तो जदयू तकरीबन 40 सीटें प्रथम चरण में लड़ेगी (इस संख्या में हम की सीटें भी शामिल है।) जैसी की संभावना है हम को 5 सीटें मिलेंगी लिहाजा भाजपा के खाते 28 से 30 सीटें आएंगी।
सर्वाधिक 50 सीट पर राजद के प्रत्याशी होंगे, कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं राह

महागठबंधन के सीट बंटवारे में पहले चरण में कांग्रेस की 9 सिटिंग सीटें हैं। बरबीघा विधायक सुदर्शन कुमार के जदयू में शामिल हो जाने से 8 ही बचे हैं। 2015 की जीती सीटों में सिर्फ कहलगांव ही है जो पार्टी 2010 में भी जीती थी। विक्रम, बक्सर, औरंगाबाद और वजीरगंज में कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा को हराकर विधानसभा पहुंचे थे।

कुटुम्बा की सीट जदयू ने बीते चुनाव में कांग्रेस के लिए छोड़ी थी जहां भाजपा की तब सहयोगी रही ‘हम’ और सिकंदरा में ‘लोजपा’ को कांग्रेस प्रत्याशियों ने हराया। गोविंदपुर से जदयू के सिटिंग विधायक कौशल यादव थे। सीट कांग्रेस के खाते गई तो उन्होंने वहां से पत्नी पूर्णिमा यादव को लड़ाया जो जीतीं भी। पूर्णिमा फिर जदयू में लौट गई हैं। पहले चरण की सिटिंग सीटों के अलावा सासाराम और भभुआ भी कांग्रेस के खाते जाने की उम्मीद है। हालांकि आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
लोस चुनाव में 50 विस क्षेत्रों में एनडीए आगे

लोकसभा चुनाव का विधानसभावार विश्लेषण बताता है कि पहले चरण की तकरीबन 50 सीटों पर भाजपा-जदयू गठजोड़ आगे था। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की पिच बिल्कुल ही अलग होती है,फिर भी एनडीए को बढ़त दिखती है।

लोजपा को भी जोड़ लें तो संख्या 61 होती है। तब तीनों दल साथ लड़े थे। विधानसभा चुनाव लोजपा अलग लड़ रही है। हम, साथ आ गई, सो, लोकसभा जैसा नतीजा तो नहीं ही होगा। लोकसभा चुनाव में 20 विधानसभा क्षेत्रों में कांटे की टक्कर हुई थी।
भाकपा-माले के हिस्से गठबंधन में आई 19 सीटों में से आठ पहले चरण में है

भाकपा-माले के हिस्से गठबंधन में आई 19 सीटों में से 8 पहले चरण में है। इनमें पार्टी की इकलौती सिटिंग सीट तरारी है। राजद ने अपनी सिटिंग सीटें पालीगंज, आरा, काराकाट और अरवल माले को दी हैं। पालीगंज से राजद विधायक जयवर्द्धन यादव जदयू में चले गए हैं।

सीटों के इस लेन-देन में तीन राजद विधायक-आरा से मो.नवाज आलम, काराकाट से संजय कुमार सिंह, और अरवल से रविन्द्र सिंह बेटिकट हो गए हैं। तीन सीटें घोसी, डुमरांव और अगियांव जदयू के पास हैं। भाजपा-जदयू में सिटिंग-गेटिंग का फार्मूला लागू हुआ तो यहां, माले से ही मुख्य मुकाबला होगा।

इनमें अगियांव सीट 2010 में भाजपा जीती थी (तब भाजपा-जदयू साथ थे) लेकिन 2015 में जदयू (तब जदयू-राजद-कांग्रेस का गठजोड़ था) के प्रभुनाथ प्रसाद जीत गए। तरारी पर माले के सिटिंग विधायक सुदामा प्रसाद हैं जो महज 272 वोटों से लोजपा की गीता पाण्डेय को हराकर जीते थे।

भोजपुर में भाकपा माले के 15 हजार कैडर हैं। पार्टी के अनुसार खेत ग्राम मजदूर सभा (खेमस) के 2 लाख और किसान सभा के 1.5 लाख सदस्य हैं। भाकपा-माले के लिए प्रथम चरण की सभी सीटें काफी महत्व रखती हैं। लेकिन लड़ाई आसान नहीं है।
इन सीटों पर कांटे की टक्कर
पालीगंज, मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी, संदेश, अगियांव, जगदीपुर, रामगढ़, अरवल, कुर्था, घोसी, मखदुमपुर,गोह, ओबरा, औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, बेलागंज, अतरी और नवादा



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महागठबंधन के घटक दलों में तीन ही इस चरण में एनडीए से दो-दो हाथ करते दिखेंगे।


Source From
RACHNA SAROVAR
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