पति की लंबी आयु की कामना को लेकर महिलाओं ने बुधवार को करवा चौथ का व्रत किया। दिन भर उपवास कर महिलाओं ने सामूहिक रूप से रात में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर चलनी में पति का चेहरा देखा और जल ग्रहण कर उपवास तोड़ा।
चंद्रोदय रात्रि 7:57 बजे हुआ। पंडित रमेश झा ने बताया कि पुराणों में श्रीकृष्ण और सत्यभामा के अटूट प्रेम की कथा का वर्णन है। पर्व को लेकर सुहागिनों ने सोलह शृंगार किया। हाथ में मेंहदी रचाई और दिनभर निराहार रहने के बाद दोपहर के समय लोटे में जल लेकर करवा चौथ की कहानी सुनी और फिर जल से चन्द्रमा को अर्घ्य दिया गया। पूजा के दौरान हलवा, पूरी, चूरमा, खीर तथा मिठाई का भोग लगाया गया। पहली बार व्रत करने वाली महिलाओं को 13 मिट्टी का करवा (कलश) का पूजा कर सभी सुहागिनों को एक-एक कलश दिया गया।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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