7 हजार करोड़ के जल जीवन मिशन के टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत के बाद भूपेश सरकार अब नए सिरे से टेंडर करेगी। इस बार टेंडर पीएचई के ईएनसी ऑफिस से सेंट्रलाइज्ड न होकर जिला स्तर पर होंगे। शुक्रवार रात इस मामले में मुख्य सचिव की जांच कमेटी के साथ रिव्यू के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को घोषणा की। सीएम ने कहा है कि जल्द ही इसे लेकर हम केंद्र सरकार को पत्र लिखने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में टेंडर इसी तरह जारी किए गए हैं।
सेंट्रलाइज्ड टेंडर की बजाए जब जिले स्तर पर टेंडर निकाले जाएंगे, तो इसका फायदा ज्यादा होगा। भूपेश ने कहा कि टेंडर हमने इसलिए निरस्त किया था क्योंकि बलरामपुर के ठेकेदार को सुकमा, तो दंतेवाड़ा के ठेकेदार को सूरजपुर में काम दिया गया, जबकि छोटे-छोटे काम स्थानीय स्तर पर दिए जाने चाहिए। कई मंत्रियों,विधायकों और ठेकेदारों ने इसे लेकर शिकायत की थी।
पाइपलाइन का ट्रांसपोर्टेशन, स्कील्ड लेबर दूरदराज के इलाकों में लेकर जाने से भार ज्यादा पड़ेगा। पूर्व में जारी टेंडर में भारी गड़बड़ी पर भूपेश बघेल ने कहा कि जब किसी को एक पैसा भी नहीं गया, तो गड़बड़ी कैसे हो गई? टेंडर में ऐसी गड़बड़ी रमन सिंह के वक्त होती थी, जब कवर्धा में एक टेंडर निरस्त होने के बाद गड़बड़ी करने वालों को ही टेंडर दे दिया गया था। गड़बड़ी इसे कहते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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