निजी बस ऑपरेटरों ने चार दिन बाद ही सिटी में बसें चलाना कम कर दिया है। ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें घाटा हो रहा है। बीते चार दिन पहले निजी बस ऑपरेटरों ने 50 फीसदी क्षमता के साथ बसों को चलाने का फैसला लिया था। जबकि अब अधिकतर बस ऑपरेटरों ने अपनी बसें खड़ी कर दी हैं।
ऑपरेटरों का कहना है की 50 फीसदी सवारियों के साथ बसें चलाने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। शिमला शहर में 40 फीसदी ही निजी बसें चल रही है, जबकि 60 फीसदी बसें खड़ी हो गई है। शिमला में निजी बस ऑपरेटरों ने 80 में से महज 34 बसें ही रूटों पर चलाई जा रही हैं।
ऐसे में अधिकतर बसें खड़ी कर दी गई हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि दिन भर रूटों पर चलने से औसतन 2400 का डीजल लगता है। जबकि कमाई महज 1500 रुपए हो रही है। ऐसे बस ड्राइवर और कंडक्टर का खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है।
ऑपरेटरों का आरोप है कि प्रदेश सरकार निजी बस ऑपरेटरों से सौतेला व्यवहार कर रही है। शिमला बस ऑपरेटर के सचिव सुनील चौहान का कहना है कि 50 फीसदी क्षमता में बसें चलाना मुमकिन नहीं है। अगर सरकार ने टैक्स माफ नहीं किया तो बसें बेचनी पड़ेगी।
अब कई रूटों पर बस सेवा ठप, यात्री परेशानः निजी बसें न चलने के कारण अधिकतर रूट अब ठप पड़े हैं। निजी और एचआरटीसी की बसें अगर वापसी के रूट पूरा करें तो शहर में लोगों को ओवरलोडिंग या बसों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। जिले में 470 रिटर्न रूट पूरे ही नहीं किए जाते हैं।
जिला शिमला में ग्रामीण रूटों को मिलाकर बसों के 978 रिटर्न रूट हैं, इसमें से 470 पर बसें चलती ही नहीं हैं। इन दिनों तो सिर्फ 40 फीसदी रूटों पर ही बसें चल रही हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
निजी बस ऑपरेटरों को कोई राहत नहींः सरकार ने 50 फीसदी क्षमता में बसें चलाने का फरमान तो जारी कर दिया है, लेकिन निजी बस ऑपरेटर को कोई राहत देने की घोषणा नहीं की है। जिस कारण निजी बस ऑपरेटर अपनी बसें चलाने में असमर्थ हैं।
ऑपरेटर्स कहते हैं कि प्रदेश सरकार एचआरटीसी और निजी बस ऑपरेटर को अलग-अलग पहलू में तोल रही है। जबकि एचआरटीसी भी एक ऑपरेटर है और निजी बस ऑपरेटर भी एक ऑपरेटर। इसलिए सरकार को चाहिए कि दोनों के साथ समान व्यवहार करें। उनका कहना है की जब तक सरकार टैक्स माफ नहीं करेगी, तब तक बसें चलाना मुमकिन नहीं है।
हम हमेशा घाटे में ही रहेः ऑपरेटर्स हिमाचल में कुछ निजी बस ऑपरेटर ऐसे भी हैं जिनके पास मात्र रोजी रोटी का साधन ही बसें है। जब 50 फीसदी क्षमता में बसें चलाने की योजना ठीक नहीं है।
निजी बस ऑपरेटर बिल्कुल ही कंगाल हो जाएगा। जिसका परिवार मात्र बस से चल रहा हो इसलिए इस व्यापार को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार को चाहिए कि वह बैंक से बिना ब्याज एवं कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराएं या कोई सरकारी राहत निजी बस ऑपरेटरों को दें।
अब रात 8ः30 बजे तक चलेंगी शहर में एचआरटीसी की बसें
सरकार के नाइट क्फर्यू समय में बदलाव करने के बाद अब राजधानी शिमला में रात 8ः30 बजे तक बस स्टैंड तक एचआरटीसी की बसें चलती रहेंगी। इससे पहले नाइट कर्फ्यू का समय 8 बजे होेने के कारण 7ः30 बजे तक अंतिम बस जाती थी ताकि कर्फ्यू शुरू होने से पहले बस अपने गंतव्य पर पहुंच जाए।
बसें 50 प्रतिशत सवारियों के साथ चलेंगी। इसमें सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है। 50 प्रतिशत सवारी होने के बाद बस में न तो सवारी खड़ी जाएगी और न ही बीच मार्ग में भी एक सवारी उतरने पर दूसरी सवारी बिठाई जाएगी ताकि नियमों का उल्लंघन न हो सके।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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