छात्र अभिभावक मंच ने डीसी से मांग की है कि वे खुद स्कूलों की जांच करें और स्कूलों द्वारा वसूले जा रहे विभिन्न शुल्कों पर रोक लगाएं। मंच का एक प्रतिनिधिमंडल संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में डीसी आदित्य नेगी से मिला और मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।
अभिभावकों ने मांग की है कि ट्यूशन फीस के अलावा अन्य चार्जेज की वसूली का मामला पीटीए व स्कूल प्रबंधन पर छोड़ने के बजाए उपायुक्त स्वयं स्कूलों की छानबीन करें व सभी तरह के चार्जेज पर रोक लगाई जाए। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल एनुअल चार्जेज, कंप्यूटर फीस, स्मार्ट क्लास रूम, केयर, मिसलेनियस अन्य चार्जेज वसूली के लिए मोबाइल संदेशों के माध्यम से अभिभावकों को डरा धमका कर मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते रहे हैं।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी का आलम यह है कि निजी स्कूल एक तरफ ट्यूशन फीस के अलावा सभी तरह के चार्जेज की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्र के शुरू में ली गई हजारों रुपए की ट्रांसपोर्ट फीस को भी न तो अभिभावकों को वापस कर रहे हैं और न ही फीस में सम्माहित कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि 8 दिसंबर 2020 की अधिसूचना भी रद्द की जाए क्योंकि यह अधिसूचना निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2020 में निजी स्कूलों में कक्षाएं ही नहीं चलीं, अभिभावकों के जनरल हाउस ही नहीं हुए तो पीटीए का गठन कब, कैसे और कहां पर हो गया।
यह भी मांग की कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए जाएं कि वे किसी भी बच्चे को ऑनलाइन क्लासेस, परीक्षाओं आदि से वंचित न करें व उनकी मानसिक प्रताड़ना न करें और जिन बच्चों को स्कूल से निकाला गया है, उन्हें तुरंत स्कूल में वापस लिया जाए। इसी तरह 10 नवंबर 2020 को शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गयी अधिसूचना को रद्द किया जाए व सभी तरह की चार्जेज वसूली पर रोक लगाई जाए।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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