स्थानीय एनआईटी में नियुक्तियों और अन्य कारगुजारियों को लेकर एआईसीटीई के चेयरमैन की इंक्वायरी कमेटी का जिन्न तो निकलने में अभी और वक्त लगेगा। लेकिन फैकल्टी के दर्जनों लोगों की रिक्रूटमेंट में एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें उनकी स्थाई नियुक्ति में प्रोबेशन पीरियड का जिक्र ही नहीं किया गया है।
एनआईटी के स्टैचू और एक्ट के मुताबिक ‘प्रोबेशन पीरियड’ हरेक कर्मचारी का लाजमी है। लेकिन पिछले दो सालों में जो नियुक्तियां यहां हुई हैं, उस कड़ी में यह भी सबसे महत्वपूर्ण मामला प्रकाश में आया है।
सूत्रों के मुताबिक एमएचआरडी और बीओजी के चेयरमैन ने इसकी तमाम जानकारी संस्थान से मांगी है।
इसके अलावा करीब तीन दर्जन सवालों पर आधारित ‘क्वेश्चन ईयर’ केंद्र ने जो मांगा था उसकी रिपोर्ट भी संस्थान ने भेज दी है। इसमें ऐसे ऐसे सवाल पूछे गए हैं,जिनका जवाब देने में तत्कालीन कर्ता-धर्ताओं को भी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
क्योंकि वे इन सभी मामलों में कर्णधार बने हैं। दरअसल में परिवीक्षा अवधि यानी प्रोबेशन पीरियड किसी भी रिक्रूटमेंट को अमलीजामा पहनाने के लिए 1 साल तक सुगंधित कर्मचारी पर लागू होता है जिसमें कर्तव्यों का निर्वहन और सेवा में वह कितनी सजगता से काम करने के योग्य है। इन तमाम चीजों को लेकर वह पीरियड उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
यदि प्रोबेशन पीरियड को किसी कर्मचारी के नियुक्ति पत्र में नहीं जोड़ा जा रहा हो, तो वह संस्थान के एक्ट के खिलाफ माना जाता है। फैकल्टी की लगभग तीन दर्जन नियुक्तियों में ऐसा यहां हुआ पाया गया है। रिपोर्ट मांगी गई है, और वह भी इंक्वायरी कमेटी की फाइल में जुड़ेगी।
सूत्रों के मुताबिक बीओजी के चेयरमैन चंद्रशेखर ने संस्थान से करीब तीन दर्जन प्वाइंट्स पर ‘क्वेश्चन ईयर’ के आधार पर जवाब देने के लिए जो पत्र लिखा था, वह संस्थान ने अब भेज दिया है। उसमें इन नियुक्तियों के दौरान रजिस्ट्रारों और अन्य महत्वपूर्ण संबंधित पदों पर बैठे लोगों की भूमिका पर भी जवाब मांगा गया है।
कहीं रिटन टेस्ट एग्जाम, तो कहीं केवल स्क्रूटनिंग
संस्थान में एआर डीआर की नियुक्तियों के मामले में कम आवेदन आए थे और उसमें रिटन एग्जाम कंडक्ट करवाया गया। जबकि फैकल्टी मेंबर्स की रिक्रूटमेंट प्रक्रिया में काफी बड़ी तादाद में आवेदन आए, मगर वहां रिटन टेस्ट नहीं कराया गया। इस पर भी जांच का शिकंजा चढ़ा हुआ है। संस्थान में नियुक्तियों और अन्य मामलों में बार-बार और ज्यादातर संख्या में इलाहाबाद इलाके से ही विशेष एक्सपर्ट आखिर क्यों बुलाए जाते रहे? इनकी तादाद काफी है और संस्थान से इसकी भी रिपोर्ट मंगवाई गई है।
रिपोर्ट तलब की
इधर बीओजी के चेयरमैन प्रो. चंद्रशेखर का कहना है कि रिपोर्ट तलब की गई है। संस्थान से पूछा गया है कि प्रोबेशन पीरियड नियुक्ति पत्रों में आखिर क्यों नहीं जोड़ा गया? क्या स्टेच्यू और एक्ट में इसका जिक्र नहीं है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह नियमों के खिलाफ है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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