सिरमौर जिले के नाहन में देश का पहला आयुष अस्पताल तो खोल दिया है। लेकिन अभी तक भी जिला में कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए डेडिकेटेड कोविड अस्पताल नहीं है। 12 अगस्त को हाईकोर्ट ने एक आदेश पारित किया था जिसमें स्वास्थ्य विभाग को कहा गया था कि सोलन और सिरमौर के कोरोना पीड़ित मरीज जिनकी हालत बिगड़ जाए उनको तब तक शिमला में न लाया जाए जब तक सिरमौर या सोलन के अपने हॉस्पिटल में बेड की कमी न हो।
हैरानी की बात है कि अभी तक सरकार व स्वास्थ्य विभाग कोविड केयर सेंटर और कोविड हॉस्पिटल का फर्क ही नहीं समझ पा रही है। इस समय सिरमौर जिले में डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल की जरूरत है। ताकि अगर कॉविड केयर सेंटर में किसी मरीज की हालत बिगड़ जाती है तो उसको वहां पर शिफ्ट किया जा सके, लेकिन 5 महीने बीत जाने के बाद भी जिला सिरमौर के डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में एक भी बेड को गंभीर हालत में क्रिटिकल कोविड पेशेंट के लिए नहीं बदला है। पड़ोसी राज्य हरियाणा उत्तराखंड, चंडीगढ़ और पंजाब में हिमाचल के मरीजों को वैसे भी प्राइवेट या सरकारी कहीं भी भर्ती नहीं किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि 15 अगस्त को जिला स्तरीय स्वतंत्रता समारोह में माननीय स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल सिरमौर के दौरे पर आए थे।
उन्होंने स्थानीय मेडिकल कॉलेज का दौरा करना भी ठीक नहीं समझा और वह वापस चले गए। हांलाकि अभी तक सिरमौर जिले में ऊर्जा मंत्री के अलावा कोई गंभीर कोरोना रोगी नहीं है। सिरमौर से किसी को भी मेडिकल संस्थान में शिफ्ट करने की नौबत नहीं आई है।
जिला सोलन में एक मरीज की मृत्यु इसीलिए हो गई थी कि समय से अधिकारी यह निर्णय नहीं ले पाए कि उनको किस संस्थान में ले जाया जाए और हालत बिगड़ने पर उसकी मृत्यु हो गई।
गंभीर रोगियाें के उपचार की व्यवस्था ही नहीं : जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए सरकार जरूरी कदम उठाए। ताकि कोई भी किसी की मौत इलाज के अभाव में न हो। प्रदेश के हाईकोर्ट ने उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें दूसरे जिलों के मरीज को शिमला में न लाने की बात कही गई है। अगर किसी कारणवंश कोविड केयर सेंटर में किसी मरीज की हालत बिगड़ जाती है या उसको सिर्फ ऑक्सीजन लगाने की नौबत आ जाए तो इसका इंतजाम किसी भी केयर सेंटर में नहीं है।
इसलिए जिला में एक डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल होना बहुत जरूरी है। जिला प्रशासन और सरकार ने नाहन में एक आयुष कोविड हॉस्पिटल तो बना दिया लेकिन गंभीर कोरोना रोगियों के उपचार की व्यवस्था नही हैं पांवटा कांग्रेस के नेता अनिंदर सिंह नौटी ने कहा कि सरकार प्रशासन व विभाग लोगो की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहा है क्योंकि सभी जानते हैं कि आयुष हॉस्पिटल में कोरोना के गंभीर मरीजों को ट्रीटमेंट नहीं दी जा सकती। जिला सिरमौर के सीएम केके पराशर ने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीजों को शिमला ही भेजना पड़ता है क्योंकि सिरमौर जिले में मात्र केयर सेंटर है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment