अब शहर को नगर निगम बनाने की दिशा में संघर्ष तेज हो गया है। शनिवार को सोलन की नगर निगम संघर्ष समिति ने पंचायतों के हक में आवाज उठाते हुए पंचायतों के अधिकारों का ध्यान रखने के पक्ष में आ चुकी है। संघर्ष समिति ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि शहर को नगर निगम बनाने का सपना अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि नगर निगम बनाने के साथ-साथ जिन पंचायतों का शहरीकरण किया जाना है उनके अधिकारों को बहाल रखा जाना चाहिए। नगर निगम संघर्ष समिति के प्रभारी कुल राकेश पंत ने कहा कि अगर पंचायतों को इसमें शामिल किया जाता है तो पंचायतों के अधिकार बहाल रखने होंगे।
इसके अलावा उन्हें टैक्स के दायरे से बाहर रखना होगा। पंत ने कहा कि धर्मशाला को जब नगर निगम बनाया था, उस समय भी तीन वर्षों के लिए नई शामिल की गई पंचायतों को टैक्स व अन्य कई तरह के नियमों से बाहर रखा था। इस अवधि को सरकार ने पांच वर्षों तक बढ़ाया भी था।
उन्होंने मांग उठाते हुए कहा कि सोलन को नगर निगम बनाया जाता है तो यहां शामिल होने वाली पंचायतों को भी इस तरह की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से लगातार नगर परिषद को नगर निगम बनाने की लड़ाई लड़ी जा रही थी। इस कड़ी में उन्होंने अब तक आठ हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षर, 800 से अधिक पोस्टर दुकानों व लोगों के घरों पर लगाए।
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RACHNA SAROVAR
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