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कोरोना के साथ अब डेंगू भी मारने लगा डंक, खाजपुरा व कंकड़बाग समेत शहर के कई इलाकों में मिले मरीज

कोरोना के संक्रमण के बीच अब डेंगू ने भी डंक मारना शुरू कर दिया है। खाजपुरा और उसके पास अशोकपुरी के कई घरों के लोग डेंगू से पीड़ित हो गए हैं। अशोकपुरी के निवासी अभय कुमार को बुखार हुअा तो उन्होंने प्राइवेट लैब में जांच कराई। इनकी एनएस-1 रिपोर्ट पॉजिटव आ गई। दो रोज बाद उनका बेटा भी बुखार से पीड़ित हो गया। बेटे की जांच कराई ताे उसकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई। उन्हाेंने कहा कि उनके इलाके में कई घर के करीब 20 लोग बुखार से पीड़ित हैं।
वरीय पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि एक सप्ताह के दौरान डेंगू (एनएस-1) के करीब 15 मरीज मिले हैं। ये कंकड़बाग, राजेंद्रनगर और पटना सिटी इलाके के रहने वाले हैं। हर साल जुलाई से डेंगू का प्रकोप शुरू हो जाता है। बारिश के बाद जमा पानी में डेंगू के मच्छर पैदा हाेते हैं।

दो तरह की जांच: बुखार होने के दो व पांच दिन बाद
बुखार होने के एक-दो दिन के अंतराल में एनएस-1 जांच होती है। पांच दिन बाद आईजीएम जांच कराई जाती है। कोरोना की वजह से पीएमसीएच में अभी डेंगू की जांच नहीं हो रही है। अगले सप्ताह से यहां डेंगू की जांच शुरू की जाएगी और इलाज के लिए स्पेशल वार्ड की भी व्यवस्था होगी। यहां जांच और इलाज की व्यवस्था नि:शुल्क होगी। यह जानकारी प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी ने दी।

बर्तन या गमलों में नहीं जमा हाेने दें पानी

  • पीएमसीएच के वरीय फिजिशियन (पल्मोनोलॉजिस्ट) डॉ. बीके चौधरी ने कहा कि एडीस मच्छरों के काटने से यह बीमारी लगती है।
  • डेंगू के मच्छर दिन में ही (सुबह 6 से शाम 6 बजे तक) काटते हैं। डेंगू के मच्छर तीन फीट से अधिक ऊपर नहीं उड़ते हैं। इसलिए ज्यादातर पैर में ही काटते हैं। ये साफ जमा पानी में ही पनपते हैं।
  • घर के आसपास या किसी बर्तन में पानी जमा नहीं रहने दें। पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें। छत पर या फूल के गमले में पानी जमा नहीं होने दें।

डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, पीठ और कमर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में लाल चकत्ता। इसे ब्रेक बोन फीवर के नाम से भी जाना जाता है।

क्या है बचाव
मच्छरों से बचाव के लिए साफ-सफाई ध्यान रखें। घर में मच्छरदानी या रिप्लेंट का इस्तेमाल करें। बच्चों और बुजुर्गों को पूरा कपड़ा पहनाएं जिससे पूरा बदन ढंका रहे।

क्या है इलाज
डेंगू के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है। इसका सिम्टोमेटिक इलाज होता है। बुखार है तो बुखार की दवा दी जाती है। प्लेटलेट्स की जांच करानी पड़ती है। यदि प्लेटलेट्स 20 हजार पर पहुंच गया है तो चढ़ाने की जरूरत होती है। मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। खूब पानी या तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

नगर निगम का हाल : 75 नई मशीनें खरीदीं, पर नहीं हाेती नियमित फाॅगिंग

डेंगू के प्रकाेप काे देखते हुए मच्छरों काे मारने के लिए नगर निगम ने वर्ष 2019 में 75 फॉगिंग मशीनें खरीदीं। पहले से 35 मशीनें थीं। लेकिन इनका सही तरीके से उपयाेग नहीं हाे रहा है। इससे मच्छर का प्रकाेप फैल रहा है। फॉगिंग करने वाले कर्मियों का कहना है कि ये मशीन काफी नाजुक हैं। इन्हें छोटे पिकअप वाहनों पर लोड किया गया है। सड़क जरा भी खराब होती है तो ये मशीन काम करना बंद कर देती हैं। एकबार खराब होने के बाद मरम्मत में काफी समय लग जाता है।

डेंगू से प्रभावित जगनपुरा, रामकृष्णानगर, सरिस्ताबाद, गर्दनीबाग, बेउर, सैदपुर, लोहानीपुर आदि इलाकों में भी नियमित तौर पर फॉगिंग नहीं कराई जा रही है। फॉगिंग के लिए पिछले दिनों मैलेथियॉन की कमी बाधक बनी। इसी से फॉगिंग कराई जाती है। पहले बड़ी मशीनों से फॉगिंग कराई जाती थी। इसमें 80 लीटर डीजल, पांच लीटर पेट्रोल व एक लीटर मैलेथियॉन डाला जाता था। नई मशीनों की टंकी में 10 से 12 लीटर ही मिश्रण से फॉगिंग होती है।

अभी डेंगू से संबंधित कोई शिकायत कहीं से नहीं मिली है। किसी अस्पताल ने ऐसी सूचना नहीं दी है। -डॉ. आरके चौधरी, सिविल सर्जन



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Along with Corona, dengue also started stinging, patients found in many areas of the city including Khajpura and Kankarbagh


Source From
RACHNA SAROVAR
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