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नगर निगम में पंचायतों के प्रस्तावित विलय को लेकर बैठकें जारीं, माकपा भी उतरी विरोध में

सोलन को नगर निगम बनाने की कवायद में आसपास की पंचायतों का विलय रोड़ा बन सकता है। इन दिनों सोलन शहर के साथ लगती पंचायतों में इस मामले को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है और अब मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी भी पंचायतों को नगर निगम में मिलाने के विरोध में आ गई है। पंचायतों के लोग नगर निगम बनाने के विरोध में नहीं है,लेकिन पंचायतों को इसमें मिलाने के खिलाफ हैं। माकपा ने इस मसले पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
नगर परिषद सोलन को नगर निगम बनाने की कोशिशें पिछले छह साल से चल रही हैं। इस दौरान कई प्रतिनिधिमंडल पहले कांग्रेस और फिर भाजपा सरकार से मिल चुके हैं, लेकिन आबादी की शर्त के कारण अभी तक यह मामला सिरे नहीं चढ़ पाया है। अब पिछली मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोलन नगर परिषद को अपग्रेड कर नगर निगम बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसके लिए जो प्रस्ताव तैयार किया गया है उसमें शहर के आसपास की आठ पंचायतों को मिलाया जाना है। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। दरअसल, नगरनिगम के मापदंड पूरे करने के लिए2011की जनगणना के मुताबिक शहर की50हजार की जनसंख्या होनी चाहिए । जबकि2011 की जनगणना के मुताबिक सोलन नगर परिषद एरिया की आबादी39,256थी। इसके लिए आसपास की पंचायतों को मिलाया जाना प्रस्तावित है। शहर के साथ लगती बसाल, पड़ग, सलोगड़ा, शामती,कोठों, सेरी, सपरून और आंजी पंचायतों को प्रस्तावित नगर निगम में मिलाए जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव का पहले पंचायत प्रतिनिधियों ने डीसी को ज्ञापन सौंप कर विरोध किया, इसके बाद इन दिनों पंचायत के लोग बैठक कर इस पर मंथन कर रहे हैं। आंजी और पड़ग पंचायतों में ऐसी बैठकें हो चुकी हैं। पंचायत के लोगों का कहना है कि नगर निगम में विलय होने पर ग्रामीण लोगों पर टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। साथ ही कृषकों को मिलने वाली सब्सिडी भी समाप्त हो जाएगी।

कृषि से जुड़े क्षेत्रों को निगम में न किया जाए शामिल: माकपा
अब इस मामले में माकपा भी विरोध में खड़ी हो गई है। जिला सचिव मोहित वर्मा ने कहा कि ग्रामीण इलाकों खासकर,कृषि से जुड़े क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंेने कहा कि ग्रामीणों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा किमाकपा नगर निगम बनाए जाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों को नगर निगम में जोड़ा जाना कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि ग्रामीण क्षेत्र व आबादी को सोलन निगम में शामिल किया गया तो पार्टी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेगी व एक बड़ा व ग्रामीणों के पक्ष में निर्णायक आंदोलन लड़ेगी।

शहर का विकास रहेगा एजेंडा

माकपा का मानना है कि सोलन को नगर निगम में तब्दील करने से बाद में जो भी योजनाएं बनेगी उसमें शहर का विकास मुख्य एजेंडा रहेगा और ग्रामीण इलाके जिन्हें सोलन नगर निगम में शामिल करने के लिए प्रस्तावित किया गया हैं उन क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाएगा। शहर के और गांव के विकास कार्य दोनों अलग अलग हैं। जहां शहरों में जमीन मालिक 4 से 10 बिस्वा के हैं ओर उन पर मकान बने हैं उनके विकास कार्य में मुख्य रूप से बिजली, पानी,कूड़ा व सीवरेज अहम हैं। वही, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास दो बीघा से 20 बीघा (कृषि भूमि) के साथ शामलात में भी अधिकार है। उनके लिए विकास कार्य मे मुख्य रूप से कृषि व बागवानी से जुड़ी योजनाएं जैसे भूमि सुधार, सिंचाई टैंक का निर्माण व बागवानी के कार्य हैं। ऐसे में किसानों व ग्रामीणों का विकास नगर निगम में जाने से नहीं बल्कि पंचायतीराज व्यवस्था में बने रहने से है।



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Meetings continue on proposed merger of Panchayats in Municipal Corporation, CPI (M) also came out in protest


Source From
RACHNA SAROVAR
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