(मो. सिकंदर) अभी जीत-हार की नहीं, उम्मीदवार काैन हाेगा, चर्चा का विषय यही है। हर कोई मान कर चल रहा है कि कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ फिर मैदान में होंगे ही, सामने कौन होगा यह तय नहीं है। एनडीए में यह सीट भाजपा के खाते में जाने की संभावना है। एनडीए के उम्मीदवार पर अटकलें जारी हैं।
बिक्रम के शहीद चौक स्थित अरविंद कुमार की चाय दुकान पर चुनावी बातचीत में मशगूल लोगों में गोपाल तिवारी कहते हैं-इलाके में पहले भी कोई काम नहीं हुआ। बीते पांच साल में भी नहीं हुआ। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नदारद है। हर घर तक नल का जल पहुंचाने के लिए सभी सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है। अब पानी भी नहीं पहुंच रहा।
बिक्रम, ग्रेटर पटना का हिस्सा नहीं है। इसकी कसक भी लोगों में है। स्थानीय अरविंद कुमार कहते हैं कि इसी विधानसभा क्षेत्र के नौबतपुर को ग्रेटर पटना में रखा गया है, लेकिन हमें अलग कर दिया गया। यह सही नहीं है। बिक्रम नगर पंचायत क्षेत्र होने के कारण सड़क व नाली-गली योजना पर काम हुआ है। लेकिन, सीवर लाइन नहीं है।
किसानों का कहना है कि नहर में पानी नहीं आना बड़ी समस्या है। जब भी आवाज उठती है, तो कहा जाता है कि सोन में पानी ही नहीं है। यूरिया भी समय पर नहीं मिली। बाजार समिति नहीं रहने से किसानों को उपज खुले बाजार में बेचनी पड़ती है।
ट्रॉमा सेंटर 12 साल पहले बना, अबतक चालू नहीं
बिक्रम प्रखंड में करीब 12 साल पहले तत्कालीन राज्यसभा सांसद सीपी ठाकुर की ओर से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराया गया, लेकिन यह अबतक चालू नहीं हो सका है। अब भी लोगों को आपात स्थिति में पटना की दौड़ लगानी पड़ती है।

लोकसभा चुनाव में सड़क के लिए दो बूथों पर हुआ था वोट बहिष्कार
गांव में सड़क निर्माण को लेकर 2019 के लोकसभा के चुनाव में नौबतपुर के दो बूथों पर लोगों ने वोट बहिष्कार किया था। बूथ संख्या 201 उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चर्रा में 862, जबकि बूथ संख्या 329 प्राथमिक विद्यालय सलारपुर में 961 वोट थे। सड़क का मुद्दा अभी कायम है।
यह है वोटों का गणित
क्षेत्र में भूमिहार वोटरों की संख्या करीब 1.10 लाख है। दूसरे नंबर पर यादव वोटर हैं जिनकी संख्या करीब 75 हजार है। अतिपिछड़ा वोट करीब 20 हजार, वैश्य 16 हजार व अल्पसंख्यक 16 हजार वोट हैं। वहीं, दलित व महादलित वोटरों की संख्या करीब 40 हजार है।
2015 : तीन दल साथ आए तो बड़ा हो गया जीत का अंतर
वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-जदयू ने मिलकर लड़ा था। दूसरी तरफ लोजपा के उम्मीदवार को राजद का समर्थन था। भाजपा के अनिल कुमार को 38965, लोजपा के सिद्धार्थ को 36613 वोट मिले थे। सिद्धार्थ महज 2352 वोट से हारे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में तीन दल कांग्रेस, जदयू और राजद एक साथ आए तो जीत का अंतर काफी बड़ा हो गया। कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धार्थ को 94088 वोट मिले और उन्होंने 44311 वोटों से जीत हासिल की।
सीट का इतिहास
बिक्रम से 1957 के पहले चुनाव में कांग्रेस की मनोरमा देवी जीती थीं। 1962 में भी उन्हें ही जीत मिली। 1967 में कांग्रेस के एम गोपाल तो 1969 और 1972 में खदेरन सिंह (कांग्रेस-ओ) जीते थे। 1977 में भाजपा के पितामह कैलाशपति मिश्रा जनता पार्टी की टिकट पर जीते। सीपीआई के रामनाथ यादव 1980, 1985, 1990 व 1995 में जीते। 2000 में भाजपा के रामजनम शर्मा जीते। भाजपा के अनिल कुमार 2010 और अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में जीते थे, जबकि 2005 के फरवरी में हुए चुनाव में वह लोजपा के टिकट पर एमएलए बने थे।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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