राजधानी के बोरियाकला में रहने वाले 60 साल के अनूप सिंह ( परिवर्तित नाम) 19 सितंबर को पॉजिटिव आए। उनके परिवार से उनकी पत्नी व छोटा भाई भी संक्रमित मिले। अनूप की 24 सितंबर को मौत हो गई। अब हालात ऐसे हैं कि भाई के साथ पत्नी भी उनका अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाई, ना ही परिवार का कोई सदस्य उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हो पाया। पत्नी से चाहा भी कि उन्हें एक बार देखने को मिल जाए लेकिन वे भी हॉस्पिटल में हैं तो उन्हें छुट्टी नहीं मिली। इसलिए वे नहीं गईं। छोटे भाई ने बताया कि वे असहाय हो गए हैं।
इस परिवार के फ्रेम से तीन चेहरे चल बसे

बिलासपुर के अग्रवाल परिवार में 12 सदस्य थे। माता-पिता और भाई की मौत हो गई। इसी समय तीन और सदस्य पाॅजिटिव थे। अब 47 वर्षीय राकेश अग्रवाल, उनकी 45 वर्षीय भाभी और 38 साल की बहू कोरोना से जीतकर घर पर स्वस्थ हैं। लेकिन एक हफ्ते में 3 मौतें घर में देखीं। राकेश कहते हैं कि भाई के छोटे बच्चोंं को देखने पर रोना आता है।
पांच लोगों के परिवार का एक ही सहारा थे पापा, समझ नहीं आ रहा, आगे क्या हाेगा
23 साल की रमा (बदला नाम) के पिता की कोरोना इलाज के दौरान अंबेडकर अस्पताल में मौत हो गई। उनकी उम्र 53 साल थी। पांच लोगों का परिवार अब ये सोचकर चिंता में है आगे क्या होगा? भाई ने लव मैरिज की, लेकिन उसका परिवार भी एक ही छत के नीचे पिता ही चला रहे थे। कोरोना से परिवार में मौत के बाद रिश्तेदारों ने भी फोन पर ही संवेदनाएं दी। कोई आसरा दूर दूर तक नजर नहीं आता, क्योंकि हमारे सबसे बडे़ दर्द में जब कोई ढांढस बंधाने नहीं आया तो आगे क्या होगा। दिन रात यही सोचकर घुटन होती है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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