छात्र संगठन एसएफआई ने कहा है कि अगर विवि प्रशासन ने मेरिट पर प्रवेश दिया ताे कई छात्राें का भविष्य खराब हाेगा। एसएफआई की एचपीयू इकाई ने शिमला में पत्रकाराें से बात करते हुए कहा कि विवि प्रशासन छात्राें के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। कैंपस अध्यक्ष रविंद्र चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन ने 1 मई 2020 को नोटिफिकेशन जारी की।
जिसमें उन्होंने सभी पीजी, लॉ कोर्स में एंट्रेंस के आधार पर प्रवेश का फैसला लिया था। जिसे देखते हुए छात्रों ने पीजी कोर्सेज के लिए 700, एमफिल और एलएलएम में एक हजार रुपए फीस देकर आवेदन भी किया है। जिनकी संख्या लगभग 17 हजार हैं। अब अगर विश्वविद्यालय प्रशासन मेरिट आधार पर विश्वविद्यालय में प्रवेश कराती है तो यह इन तमाम छात्रों के पैसों की लूट साबित होगी।
कई काॅलेजाें में सुविधाएं नहीं एसएफआई का कहना है कि सभी काॅलेजाें में शिक्षा की गुणवत्ता एक समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर फर्नीचर व उपयुक्त संख्या में प्रोफेसर भी उपलब्ध नहीं है।
वहीं, अगर शहरों में काॅलेजाें की स्थिति की बात की जाए तो वहां छात्रों के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने के कई अवसर है। जिससे साफ जाहिर है कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले में ग्रामीण और कम सुविधा में पढ़ने वाले छात्र मेरिट में पीछे रह जाते हैं।
कई काॅलेजाें में सुविधाएं नहीं एसएफआई का कहना है कि सभी काॅलेजाें में शिक्षा की गुणवत्ता एक समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर फर्नीचर व उपयुक्त संख्या में प्रोफेसर भी उपलब्ध नहीं है।
वहीं, अगर शहरों में काॅलेजाें की स्थिति की बात की जाए तो वहां छात्रों के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने के कई अवसर है। जिससे साफ जाहिर है कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले में ग्रामीण और कम सुविधा में पढ़ने वाले छात्र मेरिट में पीछे रह जाते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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