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डॉ.दत्त के अनुसार आत्महत्या करने वालाें में 80% मानसिक राेगी

आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2020 के अवसर पर एक वेबिनार का आयोजन किया, जो कि टेलीमेडिसीन विभाग में आयोजित किया गया। इस वर्ष का थीम Mental Health for All- Greater Investment, Greater Access” था। विभिन्न विभागाध्ययक्षों, अन्य कंसल्टेंट्स, रेजीडेंट्स व राज्य के चिकित्सा अधिकारियों ने वेबिनार में भाग लिया। मनोचिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. निधि शर्मा ने इस दिन के मनाए जाने के महत्व और प्रासंगिकता के बारे में बताया।

प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने विषय आधारित व्याख्यान दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, मेंटल हेल्थ स्ट्रेस, ईलाज की उपलब्धता में कमी और मेंटल हेल्थ में अधिक खर्च की जरूरत और मानसिक स्वास्थ्य की लोगों तक अधिक पहुंच से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों के बारे में जानकारी की कमी, बीमारी से जुड़े कलंक या लांछन व मानसिक उपचार की पर्याप्त उपलब्धता में कमी आदि के कारण लोग उपचार के लिए नहीं आते।

उन्होंने कहा कि आत्महत्या 15-29 वर्ष आयु वर्ग में मृत्यु का प्रमुख कारण है और इस कोविड-19 महामारी के दौरान आत्महत्या सहित मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि हुई है। लगभग 70-80 फीसदी लोग जो आत्महत्या से मरते हैं, उनमें मनोरोग होने की संभावना होती है। अवसाद आत्महत्या से जुड़ा सबसे आम मनोरोग है। इसलिए रोकथाम के लिए अवसाद और आत्मघाती व्यवहार की शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण है।

ऐसे करें उनकी पहचान

कुछ ऐसे चेतावनी संकेत हैं–जैसे अकेले रहना, आत्महत्या के बारे में बातें करना, खुद को मारने की धमकी देना, आत्महत्या करने के तरीकों की खोज करना और करीबी परिवार के सदस्यों और दोस्तों को अलविदा कहना, मूल्यवान संपत्ति को बांट देना या एक विरासत लिखना जिन के बारे में सजग रहना जरूरी है। इन खतरे के संकेतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तत्काल संकट हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।

तत्काल सहायता के लिए हिमाचल सरकार द्वारा जारी मेडीकल हेल्पलाइन 104 से संपर्क स्थापित करें। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार, सामाजिक मेलजोल बनाए रखने आदि बातों को अपनी जीवन शैली में शामिल करने पर जोर दिया।

आईजीएमसी की पैलिएटिव यूनिट काे किया जाएगा विकसित, मंत्री ने मांगे सुझाव

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने ने कहा कि आईजीएमसी शिमला में स्थापित पेन एंड पैलीएटिव यूनिट को और विकसित करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी ताकि रोगियों के अंतिम समय में परामर्श व अन्य सहयोग प्रदान कर उनके दुख और दर्द को कम करने में सक्षम हो सके।

वह शनिवार काे अाईजीएमसी विश्व हाॅस्पिटल एवं पैलिएटिव दिवस के अवसर पर बताैर मुख्यतिथि पहुंचे। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में नई विद्या देश में विकसित हो रही है, जिस पर आज सार्थक चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इस इकाई का गठन आईजीएमसी में अभी हाल ही में हुआ है।

आने वाले समय में इस इकाई को और अधिक विकसित किया जाएगा ताकि यह पूर्ण विकसित विभाग के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर सके। उन्होंने बताया कि कई रोगों में रोगी की अवस्था ऐसी आ जाती है।

जब किसी भी चिकित्सा से लाभ नहीं मिलता और रोगी के अंतिम क्षण दुख और दर्द भरे होते हैं तब इस विद्या के माध्यम से रोगी के दुख-दर्द को कम करने और चिकित्सा दृष्टि से रोगी को मानसिक सहारा प्रदान कर परिवार वालों के परामर्श से विभिन्न दवाइयों और प्रयोगों के माध्यम से रोगी का उपचार किया जाता है।



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फाइल फोटो


Source From
RACHNA SAROVAR
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