शहर में जाम अरसे से सबसे बड़ी समस्या है। अतिक्रमण इसकी मुख्य वजह है। अधिकतर मार्गाें पर फेरी-ठेला-खाेमचा वालाें ने कब्जा जमा रखा है। बार-बार अभियान चला इन्हें हटाया जाता है। जगह देने की याेजना भी बनती है। पुलिस काे जिम्मेदारी है कि फिर से दुकानें न लगानेे दे, लेकिन वह विफल है। प्रशासन भी जगह नहीं दे पाया। यानी, न ताे दुकान सजाने वाले मानते, न प्रशासन स्थाई निदान कर पा रहा।
ऐसे में इमलीचट्टी समेत कई जगहों पर सड़क किनारे पाैधे लगवा दिए गए। चेतावनी के बाेर्ड भी टांगे गए कि यहां दुकान लगाने पर दंड के भागी हाेंगे। लेकिन, इन पाैधाें के बड़े हाेने पर अतिक्रमणकारियाें ने इन्हीं पर कपड़े टांग इनकी छांव में दुकानें सजा लीं। वन प्रमंडल अधिकारी सुधीर कर्ण ने कहा कि पाैधरोपण के बाद फैंसिंग के लिए हेडक्वार्टर को प्रस्ताव भेजा भी ताे स्वीकृत नहीं हुआ।
वाहन लगाने को जगह ही नहीं
माेतीझील में जाम राेकने के लिए नगर निगम ने ओवरब्रिज के नीचे पार्किंग स्थल बनाया। वहां ताे इतने फेरी-ठेला वालाें ने दुकानें लगा लीं कि वाहन लगाने के लिए जगह ही नहीं बची। टाउन डीएसपी कार्यालय व नगर थाना के सामने यह स्थिति है। इनके अलावा निगम ने जहां भी चेतावनी भरे बाेर्ड लगाए हैं, वहां पर अतिक्रमणकारी काबिज हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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