विधानसभा चुनाव का पहला चरण ही कई नेताओं के नेतृत्व क्षमता को इकट्ठे आंक देगा। इसी फेज में पता चल जाएगा कि लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान, हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य की चुनावी जमीन पर है जीतने वाली पकड़ है या सिर्फ उनके पास लड़ने वाली ताकत है।
इन सभी नेताओं का कार्यक्षेत्र पहले ही चरण में है। चिराग पासवान जमुई से सांसद हैं। दोबारा जीते हैं। उनके संसदीय क्षेत्र में आने वाले जमुई, झाझा, चकाई, तारापुर और शेखपुरा विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण में ही चुनाव है। चिराग, जैसा वह ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी भाजपा नहीं जदयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी, तो अपने संसदीय क्षेत्र में शेखुपरा, झाझा, तारापुर में लोजपा प्रत्याशी होंगे।
जदयू इन सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है। तीनों क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव में लोजपा ने 24 हजार से अधिक मतों की बढ़त ली थी। इन सीटों पर चिराग की वोटरों के बीच लोकप्रियता की परख होगी।
2015 के चुनाव के बाद लगातार गठबंधन बदलने वाले जीतन राम मांझी ऐन चुनाव के पहले जदयू के साथ हो लिए हैं। हिस्से में उन्हें सात सीटें-इमामगंज, बाराचट्टी, मखदुमपुर, टिकारी, सिकंदरा, कुटुंबा, कसबा मिली हैं, मांझी खुद इमामगंज से लड़ रहे हैं जो उनकी सीटिंग सीट है।
मांझी, गया संसदीय सीट से लोकसभा का भी चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए। गया संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र भी है जो ‘हम’ के खाते में है। इस सीट पर लोकसभा चुनाव में मांझी 37 हजार से अधिक मतों से पिछड़ गए थे। अब वह जदयू के साथ हैं।
एनडीए से अलग हो कुशवाहा दो लोकसभा क्षेत्रों काराकाट और उजियारपुर से लड़े, दोनों जगह हारे
रालोसपा मुखिया उपेंद्र कुशवाहा, काराकाट से सांसद थे। 2014 में जब चुने गए तो भाजपा के साथ थे, केंद्र में मंत्री बने। लेकिन 2019 के चुनाव के बाद अलग हो गए। महागठबंधन का हिस्सा बने। दो लोकसभा क्षेत्रों काराकाट और उजियारपुर से लड़े। दोनों जगह हारे।
इनमें काराकाट संसदीय क्षेत्र के अधीन आने वाले नोखा, डेहरी, काराकाट, गोह, ओबरा और नवीनगर विधानसभा क्षेत्रों में पहले चरण में ही चुनाव है। इन सीटों में कुशवाहा को गोह में बढ़त मिली थी, ओबरा में मामूली अंतर से पीछे थे लेकिन बाकी चार क्षेत्रों में 18 हजार से अधिक मतों से पिछड़े थे। मांझी की तरह ही कुशवाहा भी अब महागठबंधन से नाता तोड़ चुके हैं। बसपा से जोड़ चुके हैं।

माले का प्रदर्शन दीपांकर के महागठबंधन का हिस्सा बनने के फैसले को भी परखेगा
भाकपा-माले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा है। खाते में आई 19 सीटों में से 8 पर चुनाव पहले चरण में ही है। लोकसभा चुनाव में माले, महागठबंधन का हिस्सा तो नहीं थी लेकिन आरा संसदीय क्षेत्र में उसके उम्मीदवार राजू यादव के खिलाफ महागठबंधन ने कोई प्रत्याशी नहीं दिया था।
आरा संसदीय क्ष्रेत के तहत आने वाले संदेश, बड़हरा, आरा, अगियांव, तरारी, जगदीशपुर और शाहपुर विधानसभा क्षेत्रों में से पार्टी तरारी, अगियांव व आरा लड़ रही है। पार्टी भोजपुर को अपनी कर्मभूमि मानती रही है। गठबंधन के तहत हिस्से आई सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के महागठबंधन का हिस्सा बनने के फैसले को भी परखेगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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