देशभर में कुल्लू से एक ऐसा कार्यक्रम शुरू किया गया है जो दिव्यांग के लिए फायदेमंद सावित होगा। कुल्लू जिला मुख्यालय से थैरपी ऑन व्हील कार्यक्रम का आगाज किया गया है जिसमें एंबुलैंस के आकार के एक वाहन में थैरपी विशेषज्ञों की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पहले दिव्यांगों की पहचान करेगी और उसके बाद वाहन के पास ही उन्हें थैरपी प्रदान की जाएगी।
सांफिया नाम की फाउंडेशन ने अपने कुल्लू में चल रहे आश बाल विकास केंद्र के माध्यम से इस योजना का संचालन किया है। फाउंडेशन और केंद्र के विशेषज्ञों की माने तो इस तरह का यह देश का पहला कार्यक्रम है जिसमें वाहन गांव गांव जाकर दिव्यांग जनों को थैरपी करवाएगा।
निश्चित तौर पर इससे उन दिव्यांग जनों का ज्यादा फायदा होगा जो हमारे सैंटर या किसी भी तरह के उपचार के लिए जिला मुख्यालय आने में असमर्थ हो। हालांकि जिला मुख्यालय में चल रहे फाउंडेशन के बाल विकास केंद्र में 150 से अधिक दिव्यांग जनों को थैरेपी करवाई जा रही है लेकिन फाउंडेशन की माने तो वे ऐसे दिव्यांग जनों तक पहुंचना चाहते हैं जो किसी भी सुविधा केंद्र में जाने में असमर्थ हो।
आश बाल विकास केंद्र के थैरेपी विशेषज्ञ ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर दिव्यांग जनों के लिए काउंसलिंग, स्पेशल एजुकेशन के साथ साथ स्पीच थैरेपी, फिजियोथेरपी, ऑक्युपेशनल थेरपी करवाई जाएगी। इसके साथ ही दिव्यांग बच्चों और उनके परिवार के लिए प्रशिक्षण और समावेश इत्यादि करना बताया जाएगा।
इसलिए थैरेपी देना जरूरी
दिव्यांग जनों को थैरेपी देना इसलिए जरूरी है क्योंकि जो बच्चा या व्यक्ति दिव्यांग होता है उसकी दिव्यांगता समय के अनुसार लगातार बढ़ती रहती है। जिसके चलते दिव्यांगता को बढ़ने से रोकने के लिए थैरपी देना जरूरी है।
कम दिव्यांगता बाले थैरपी देने से ठीक होने की भी संभावनाएं बनी रहती है ऐसे में अगर कम दिव्यांगता वालों को थैरेपी दी जाए तो वे ठीक भी हो सकते हैं। कुल्लू में 4611 दिव्यांग ऐसे हैं जिसका आंकड़ा समाज कल्याण महकमें के पास और इन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है।
डेढ़ साल से कर रहे हैं काम
फिजियोंथेरपिस्ट रेखा ठाकुर का कहना है कि अभी आश बाल विकास केंद्र में भी दिव्यांगों को थैरेपी करवाई जा रही है जिसके लिए उनके पास 150 से अधिक का पंजीकरण हुआ है। लेकिन वाहन के माध्यम से गांव गांव तक जाने का यह कार्यक्रम अब शुरू किया गया है जिसमें दिव्यांगों को वाहन के माध्यम से दूर दराज के क्षेत्रों में विभिन्न तरह की थैरेपी की सुविधा दी जएगी।
दूर दराज के क्षेत्रों में दिव्यांगों को फिजियोथेरपी, ऑक्योपेशनल थैरेपी, स्पीच थैरेपी करवाई जाएगी जिसके लिए विशेषज्ञों की टीम है।
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर का कहना है कि फाउंडेशन का यह अच्छा कदम है। इससे दिव्यांग जनों को फायदा पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में यह एक अलग ही तरह का कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने आश बाल विकास केंद्र के इस वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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