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मेडिकल प्राेफेशनल और साइंटिस्ट ने लड़ी लंबी लड़ाई, इस साल राहत की उम्मीद

साेमदत्त शर्मा, प्रदेश में पिछले 10 महीने से आप सारे मेडिकल प्राेफेशनल हरदम हमारे सेवियर यानी रक्षक बनकर खड़े हैं। आपके हर वर्ग का याेगदान मानवता नहीं भूला पाएगी, लेकिन आपके सेवाभाव और बिना किसी भेदभाव निडरता के साथ की गई सेवाओ ने हमारे लिए अमूल्य याेगदान है।


कोरोनावायरस के संक्रमण के चलते जब हम आम इंसान दिन में कई दफा डरे हैं ताे भी आपके परिवार ने आपसे भी ज्यादा साहस दिखाया है। सैकड़ाें मेडिकल प्राेफेशनल हमारी जान बचाते हुए खुद इस संक्रमण की चपेट में आए। आपकी इस संक्रमण के खिलाफ ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन नए साल में पूरी दुनिया काे उम्मीद है कि आप सारे मेडिकल प्राेफेशनल और साइंटिस्ट इस दुनिया काे राहत भरा एहसास लेकर आएंगे।

नए वर्ष में आने वाली कोरोना को मात देने वाली वैक्सीन जहां लोगों को राहत देगी, वहीं आप सब को भी रोजमर्रा की भारी जद्दोजहद से निजाद दिलाएगी। हम सब आपके काेरोना संकट के दौरान किए गए कार्य को सैल्यूट करते हैं।

व्यवहार सुधारेंगे तभी सेफ रहेंगे

काेराेना पाॅजिटिव हाेने के बाद मैं काेराेना मरीजाें का हाैसला बढ़ाने के लिए काेराेना वार्ड में रहा। काेराेना काे हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए। हम अपने व्यवहार काे सुधारेंगे तभी हम खुद अाैर परिवार काे सेफ रख सकेंगे। नए साल में भी काेराेना के साथ ही जीना पड़ेगा। काेराेना की सावधानियां ही हमें सुरक्षित रखेंगी।
-डाॅ. जनकराज, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी आईजीएमसी शिमला

1-1 दिन काटना था मुश्किल

टीवी पर न्यू देखते थे कि बाहर के देशाें में लगातार माैतें हाे रही हैं ताे लगता था कि यह झूठ है। जब आईजीएमसी में भी लाेग काेराेना से मरने लगे ताे हौसला टूट गया था। एक-एक दिन काटना मुश्किल हाेने लगा। जब वह सामने हाेते थे ताे कुछ राहत मिलती थी। मगर जब यह पाॅजिटिव आए ताे हमपरेशान हाे गए थे। इन्हाेंने न केवल काेराेना मरीजाें का हाैंसला बढ़ाया बल्कि हमें भी तसल्ली देते रहे ।
-डॉ. किरण, धर्मपत्नी, डॉ.जनकराज

1-1 दिन काटना था मुश्किल

टीवी पर न्यू देखते थे कि बाहर के देशाें में लगातार माैतें हाे रही हैं ताे लगता था कि यह झूठ है। जब आईजीएमसी में भी लाेग काेराेना से मरने लगे ताे हौसला टूट गया था। एक-एक दिन काटना मुश्किल हाेने लगा। जब वह सामने हाेते थे ताे कुछ राहत मिलती थी। मगर जब यह पाॅजिटिव आए ताे हमपरेशान हाे गए थे। इन्हाेंने न केवल काेराेना मरीजाें का हाैंसला बढ़ाया बल्कि हमें भी तसल्ली देते रहे ।
-डॉ. किरण, धर्मपत्नी, डॉ.जनकराज

टेंशन थी, मगर काम भी जरूरी

मुझे और मेरे साथियाें काे काेराेना वार्ड में दिन में कई बार सफाई करनी पड़ती थी। ऐसे में कई बार मन में यह भी विचार आया कि नाैकरी छाेड़ दें। बाद में उन मरीजाें का साेचते थे जाे वार्ड में एडमिट हाेते थे। जब किसी मरीजाें की माैत हाेती थी ताे हम काफी निराश हाे जाते थे। नए साल में उम्मीद है कि दवाई आएगी और इस भयानक बीमारी से छुटकारा मिलेगा।
-ऊमा, सफाई कर्मचारी, आईजीएमसी

लगातार ड्यूटी करना मुश्किल था

मेरे लिए लगातार काेराेना वार्ड में ड्यूटी करना मुश्किल था, क्याेंकि वहां पर राेजाना मरीजाें काे मरते हुए देख रही थी।फिर भी हमने काेराेना वार्ड में ड्यूटी करने में लापरवाही नहीं की। मरीजाें काे ठीक हाेते देखने में सुकून मिलता था। हालांकि जब काेई मरीज मरता था ताे डर भी लगता था। उम्मीद है कि नए साल में वैक्सीन आएगी और हम सब इस भयानक बीमारी से सुरक्षित निकलेंगे।

रेखा, हाेमगार्ड, आईजीएमसी में काेराेना वार्ड

राेजाना बाॅडियां करते थे शिफ्ट

काेराेना से मरने वाले मरीजाें की राेजाना हम कई डेड बाॅडियां वार्डाें से एंबुलेंस में शिफ्ट करते थे। एक दिन में 10-10 बाडियां भी शिफ्ट की। इसे देखकर शुरूआत में काफी डर लगता था और दुख भी हाेता था। मगर अब केवल दुख हाेता है, डर अब गायब हाे चुका है। अब केवल एक उम्मीद है कि नए साल में वैक्सीन आ जाएगी और इस खतरनाक बीमारी से हमें राहत मिलेगी।
गाेबिंद, आईजीएमसी मे काेराेना वरियर

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कई बाॅडी पहुंचाता था श्मशान

मैं राेज काेराेना से मरने वाले कई मरीजाें की बाॅडी काे कनलाेग श्मशान घाट तक एंबुलेंस में पहुंचाता था। मुझे कई बार इसके लिए घरवालाें ने मना भी किया, मगर बीमारी से लाेगाें की जा रही थी, ऐसे में इससे भागना ठीक नहीं था। मैंने पूरी ईनामदारी से अपनी ड्यूटी की है। मैं यही उम्मीद करता हूं की नए साल में काेराेना जैसी भयानक बीमारी खत्म करने के लिए वैक्सीन आ जाए।
-याेगी राणा, एंबुलेंस चालक आईजीएमसी

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उम्मीद:नया साल बेहतर हाेगा

​​​​​​​2020 काेराेना में निकल गया। मैं और मेरी नर्सिंग टीम ने मरीजाें के लिए दिनरात एक किया। मरीजाें की सेवा करते हुए कई नर्सें पाॅजिटिव आई, मगर हिम्मत नहीं हारी। इस खतरनाक बीमारी से लगातार लड़ते गए और आगे भी लड़ते रहेंगे। बस एक उम्मीद है कि नए साल में वैक्सीन आ जाती है ताे कुछ हद तक डर कम हाेगा और पहले की तरह जिंदगी चलेगी। बेहतर मिलेगा।

सुक्रिती बिंदरा, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट आईजीएमसी



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Medical professional and scientist fought long battle, hope for relief this year


Source From
RACHNA SAROVAR
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