अगर आपको कोई ई-सिम देने के लिए कोई कॉल करता है तो उससे झांसे में बिल्कुल न आएं क्योंकि ठगी करने यह एक नया तरीका अब साइबर क्रिमिनल्स ने निकाला है। इसी तरह का झांसा देकर शिमला में प्राइवेट स्कूल में तैनात एक महिला टीचर के साथ 5.95 लाख की ठगी की गई।
टीचर को कुछ दिन पहले टेलीकॉम कंपनी के नाम से फोन आया और उनको ई-सिम जारी करने का झांसा दिया गया। टीचर से केवाईसी अपडेट करने के नाम से बैंक खाता सहित अन्य डिटेल ले ली गई। इसके बाद महिला टीचर की ई-सिम क्रिमिनल ने अपने मोबाइल फोन में एक्टिवेट करवा दी और बैंक खाते से 5.95 लाख उड़ा दिए।
साइबर पुलिस ने लोगों से इस तरह के झांसे में आने की अपील की है। देश में कई टेलिकॉम सर्विस ऑपरेटर्स अपने ग्राहकों को ई-सिम सर्विस ऑफर कर रहे हैं। इस सर्विस की मदद से बिना फोन में सिम कार्ड लगाए यूजर्स कंपनी की सर्विसेज ले सकते हैं।
यानि कि बिना सिम कार्ड के कॉलिंग, डेटा और मैसेजिंग पहले की तरह ही की जा सकती है। यह वर्चुअल मोबाइल सिम है, जिसे ई-सिम नाम दिया गया है। जानकारों की मानें तो यह सर्विस आईफोन सहित चुनिंदा महंगे मोबाइल फोन पर ही मिलती है।
यह रहता है ठगी करने का तरीकाः ठगी करने के लिए क्रिमिनल पहले कस्टमर को फोन कर ई- सर्विस ऑफर करते हैं। साथ में वे कस्टमर को अपने फोन के केवाईसी अपडेट करने को कहते है। इसे बाद वे कस्टमर को लिंक भेजते है जिसमें उसको एक फार्म भरना होता है, जिसमें अंकाउट व एटीएम की डिटेल भरी जाती है। इसके पश्चात कस्टमर से टेलीकॉम सर्विस ऑपरेटर्स को रजिस्टर ई-मेल से ई-सिम जारी करने बारा अनुरोध किया जाता है।
ऐसा करने पर कस्टमर को एक क्यूआर कोड मिलता है, जिसे साइबर क्रिमिनल कस्टमर से प्राप्त कर लेते है। इस प्रक्रिया के दौरान साइबर अपराधी टीम व्यूर और एनी डेस्क एप डाउनलोड करने को कहते है। ऐसा करने पर वे कस्टमर के मोबाइल से पूरी डिटेल हासिल करते हैं।
इसके बाद कस्टमर के बैंक खाता से लिंकड मोबाइल नंबर बंद हो जाता है व इसी नंबर का ई-सिम साइबर क्रिमिनल के मोबाइल पर एक्टिव हो जाता है, जिसकी जानकारी कस्टमर को नही रहती और न न ही उसे कोई ओटीपी आता है। इस तरह साइबर क्रिमिनल्स आनलाइन बैंकिग के माध्यम से कस्टमर के बैंक खातों एंव क्रेडिट कार्ड से पूर्ण राशि निकाल सकते है।
केवाईसी से जुड़ा प्रोसेस फोन पर नहीं होताः एडिशनल एसपी साइबर क्राइम नरवीर सिंह राठौर ने लोगों से अपील की है कि अगर आपके सिम के ब्लॉक होने का मेसेज आए तो उस पर भरोसा ना करें और जरूरी होने पर खुद कस्टमर केयर को ऑफिशल नंबर पर कॉल कर लें। वहीं लोगों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवाईसी से जुड़ा कोई भी प्रोसेस फोन पर नहीं होता, ऐसा करने से बचें।
साथ ही किसी भी स्थिति में अपने बैकिंग डिटेल्स किसी के साथ भी शेयर न करें। कोई भी टेलीकॉम कंपनी ऐसी डिटेल यूजर से कॉल पर नहीं मांगती। किसी भी सूरत में अपने मोबाईल फोन पर अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी ऐसी एप डाउनलोड न करें जिससे आपके फोन की एक्सेस दूर बैठे ही ली जा सकती है। किसी भी साइबर क्राइम का शिकार होने पर साइबर थाना से से संपर्क करें।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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