झंझारपुर अनुमंडल अस्पताल में इन दिनों अल्ट्रासाउंड की सारी सुविधा रहने के बाद भी जांच बंद है। मरीजों को बाहर में 900 से लेकर 1,000 रुपया खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। अनुमंडल अस्पताल में खास कर लाचार, गरीब किसान और मजदूर परिवार के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहते हैं। अनुमंडल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए डाॅक्टर उपलब्ध रहने के बाद भी अस्पताल प्रशासन द्वारा बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जता है।
इस संबध में जानकारों ने कहा कि महिला चिकित्सक डाॅ. सृष्टि कुमारी को अल्ट्रासाउंड की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। बावजूद अस्पताल में रहने और सेवा देने के बाद भी वह अल्ट्रासाउंड नहीं करती हैं। इस बाबत अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. सुशील कुमार पूर्वे ने कहा कि अभी कोरोना जैसी महामारी को लेकर अल्ट्रासाउंड नहीं की जाती है। प्रभारी डीएस डॉ. पूर्वे ने कहा कि डॉ. सृष्टि ही अल्ट्रासाउंड का काम करती थी। जांच अभी बंद है और अगले महीने से जांच शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल में कोरोना वायरस के डर से अल्ट्रासाउंड बंद कर दिया। वहीं प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड करने बाले डाक्टरों को कोरोना नहीं हुआ और वे मरीजों की सेवा देने में लगे रहे। इधर मरीज भारी रकम चुकाने के बाद बाजार में निजी हाॅस्पिटल में अल्ट्रासाउंड कराने पर मजबूर हैं। प्रत्येक दिन कम-से-कम चार पांच मरीज अस्पताल से बाहर अल्ट्रासाउंड कराने जाते हैं।
यदि एक दिन में पांच मरीज खुले बाजार में 5,000 रुपए देकर जांच कराते हैं तो एक महीने में डेढ़ लाख रुपए बाजार में देना पड़ता है। जबकि नई अल्ट्रासाउंड मशीन छह माह से रूम में बंद कर रखी गई है, वह वैसे ही बंद है। इस मशीन से एक दशक पूर्व भी अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीदारी हुई थी लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में वह मशीन खराब हो गई। पुनः नई अल्ट्रासाउंड मशीन आई है और वह भी फिलहाल बंद है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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