पांच महीने बाद प्रैक्टिस करने के लिए मैदान पर आए स्टेट लेवल बाॅस्केबाल खिलाड़ी दक्षवीर ठाकुर की माैत हाे गई। ये ऑकलैंड स्कूल में 10वीं क्लास के छात्र थे। प्रारंभिक दृष्टि में माैत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। हाेनहार दक्षवीर ठाकुर ने राज्य स्तर पर स्कूल के लिए बाॅस्केटबाॅल में प्रतिनिधित्व भी किया था। ऐसे में उनके इस तरह जाने से पूरे शहर में शाेक की लहर है। पुलिस और स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक स्कूल में पिछले काफी समय से स्पोर्ट्स एक्टीविटी के लिए प्रैक्टिस चली हुई है।
इसके लिए स्कूल प्रबंधन ने कुछ खिलाड़ियाें काे स्पेशल परमिशन दी है। साेमवार सुबह दक्षवीर ठाकुर भी स्पेशल परमिशन लेकर प्रैक्टिस करने के लिए मैदान में पहुंचें। वह भी अपने साथी खिलाड़ियाें के साथ प्रैक्टिस करने लग गए। सुबह करीब 7 बजकर 34 मिनट पर अचानक से दक्षवीर की तबीयत बिगड़ी, उन्हें चक्कर आया। हालांकि, उन्हें कहीं चाेट नहीं लगी। स्कूल प्रबंधन और साथी खिलाड़ी उन्हें आईजीएमसी ले गए, लेकिन वे पहले ही दम ताेड़ चुके थे।
कम उम्र में क्यों आता है अटैक, क्या हैं लक्षण, आने पर क्या करें, यहां जानें इन सभी सवालाें के जवाब
मसल अचानक तेज चलने से हाेता है हार्ट कोलैप्सः डाॅ. पीसी नेगी ने कहा कि आमताैर पर कम उम्र में इस तरह से माैत का कारण हार्ट की मसल फूलने से अचानक धड़कन तेज हाे जाती है। जिससे कुछ ही देर में हार्ट कोलैप्स हाे जाता है। अगर समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए ताे पेशेंट की कुछ ही देर में माैत हाे जाती है।
जेनेटिक प्रॉब्लम से हाेता है इस उम्र में हार्ट अटैकः डाॅ. नेगी के अनुसार इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक के चांस नहीं हाेते। इसमें जेनेटिक प्रॉब्लम मानी जा सकती है। अगर परिवार में पहले भी किसी काे इस तरह के हार्ट अटैक आया है ताे आमताैर पर इस उम्र में भी हार्ट अटैक हाे सकता है। ऐसे में अगर किसी काे जेनेटिक समस्या है ताे उन्हें जांच करवा लेनी चाहिए।
बच्चा खेलते हुए थके ताे करवाएं चेकअपः डाॅ. नेगी ने बताया कि अगर बच्चा खेलते हुए जल्दी थक जाता है। धूप में खड़े रहने से उसे चक्कर आते हैं। खेलते समय उसकी हार्ट बीट काफी तेजी से चलती है ताे ऐसे में उसके हार्ट के टेस्ट करवा लेने चाहिए। ताकि समय रहने बच्चे की बीमारी का पता चल सके और उसका इलाज हाे सके।
कार्डिएक मसाज मिल जाता ताे बच जाती जानः डॉ. नेगी ने कहा कि बच्चे काे हार्ट अटैक के दाैरान अगर कार्डिएक मसाज मिलता ताे उसकी जान बच सकती थी। आमताैर पर लाेगाें काे यह पता नहीं चलता कि हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए। खासकर स्कूलाें में टीचराें काे कार्डिएक मसाज की ट्रेनिंग देना जरूरी है। हार्ट अटैक के दाैरान कार्डिएक मसाज दिए जाने से हार्ट बीट नॉर्मल आ जाती है और मरीज की जान बच जाती है।
दक्षवीर हमारे पास सबसे हाेनहार खिलाड़ी था। उसने स्पोर्ट्स में स्कूल का नाम राेशन किया है। ऐसे हाेनहार स्टूडेंट और खिलाड़ी काे खाेना हमारे लिए बेहद पीड़ादायक है। हम दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ हैं।
माइकल जाॅन, प्रिंसिपल, ऑकलैंड हाउस स्कूल बॉयज शिमला।
दक्षवीर हमारे पास सबसे हाेनहार खिलाड़ी था। उसने स्पोर्ट्स में स्कूल का नाम राेशन किया है। ऐसे हाेनहार स्टूडेंट और खिलाड़ी काे खाेना हमारे लिए बेहद पीड़ादायक है। हम दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ हैं।
माइकल जाॅन, प्रिंसिपल, ऑकलैंड हाउस स्कूल बॉयज शिमला।
हमारा बच्चा स्पोर्ट्स में एक्टिव था। मुझे लगता है उसे हार्ट अटैक आया हाेगा। हमें किसी के बारे में कुछ नहीं कहना है। स्कूल प्रबंधन ने हर तरह से हमारी मदद की। हमारे भाग्य में ये दुख लिखा हाेगा।
ईश्वर सिंह आजाद, मृतक दक्षवीर ठाकुर के दादा
मैं खुद माैके पर गया था। प्राथमिक जांच में माैत का कारण हार्ट अटैक ही लग रहा है। पुलिस अपने स्तर पर भी जांच कर रही है। स्कूल में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।
माेहित चावला, एसपी, शिमला पुलिस
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment