एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच समन्वय बनाने की कोशिश शुरू हो गई है। इसकी जिम्मेवारी भाजपा ने उठाई है। जदयू ने भी उससे इस जिम्मेदारी को पूरा करने की बात कह रखी है। दरअसल, लोजपा के कड़े तेवर से अभी कई स्तरों पर गतिरोध बना हुआ है। जदयू के साथ उसके तल्ख संबंधों के कारण सीटों को लेकर कोई सार्थक बात शुरू नहीं हो पाई है।
भाजपा पहले एनडीए के अंदर एक स्वर बनाने में जुटी है। इसके तहत लोजपा के आक्रामक तेवर को कम करना भी शामिल है। एनडीए में नए सदस्यों की इंट्री और आगे इसकी संभावनाओं के मद्देनज़र कई चीजें नए सिरे से भी तय की जा रही हैं। रालोसपा के एनडीए में आने की संभावना के बाद सीटों का गणित बदल सकता है। मांझी पहले ही आ चुके हैं।
पिछले दिनों जदयू और भाजपा में सीटों को लेकर अनौपचारिक बातचीत हुई थी। इसमें दोनों के अपने-अपने फार्मूले थे। भाजपा के अनुसार जदयू और वह बराबर-बराबर सीटों पर लड़ेंगे शेष सीटों में से लोजपा और हम को भागीदारी दी जाएगी। भाजपा पिछली लोकसभा के फार्मूले पर सीटों का बंटवारा चाहती है। सब वह ‘बड़े’ और ‘छोटे भाई’ की, दोनों भाई समान के फार्मूले पर समझौता चाहती है।
जदयू 2010 की विस चुनाव के फार्मूले के तहत ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रहना चाहता है। इस आधार पर वह विधानसभा में भाजपा से अधिक सीट चाहता है। 2010 के चुनाव में जदयू 141 तथा भाजपा 102 सीटों पर लड़ी थी। लोजपा 42 सीटों पर दावा कर रही है। सूत्रों की मानें तो उसे 22-25 सीट तक दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। पर, इतने पर लोजपा तैयार नहीं हो रही है।
जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ के एनडीए में आ जाने से लोजपा की सीटों पर कैंची चलने का भी खतरा है। ऐसे में लोजपा और आक्रामक है। उसने 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की धमकी दे रखी है। सीट शेयरिंग में जदयू का स्टैंड बिल्कुल क्लियर है। वह गठबंधन में सभी स्तरों पर संतुष्टि का जिम्मा भाजपा को सौंप खुद को निश्चिंत किए हुए है।
राजद से केंद्रीय मंत्री ने पूछा- क्या अपनी विरासत पर शर्मिंदा है
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एनडीए में कोई विवाद नहीं है। सबकुछ सहज और सामान्य है। लोजपा की भी नाराजगी नहीं है। लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल की अपनी विचारधारा होती है। बातचीत से सब ठीक हो जाएगा। विधानसभा का चुनाव हम मिलकर लड़ेंगे। एनडीए के आला नेता जब बैठेंगे तो सारा मामला सुलझ जाएगा।
सीट शेयरिंग पर भी विवाद नहीं है। यह चुनाव समिति को तय करना है। जल्द ही सब कुछ तय हो जाएगा। राजद के पोस्टर पर लालू और राबड़ी की तस्वीर नहीं होने पर प्रसाद ने राजद को घेरा।कहा-मुख्य विपक्षी दल अपनी विरासत पर शर्मिंदा क्यों है? आखिरकार पार्टी के दोनों पूर्व सीएम की तस्वीर पार्टी के पोस्टर से क्यों गायब है?
राजद को अपनी विरासत को छिपाने की जरूरत क्यों पड़ गई? इससे साफ है कि विपक्ष अपने अतीत से शर्मिंदा है और अब बिहार की जनता को दिखाने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है। विधानसभा चुनाव में राजद को इन सवालों का जवाब देना होगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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