लंबे समय तक कोरोना संक्रमण के कारण बिगड़ी आर्थिक स्थिति से जूझ रहे लोग अब मानसिक बीमारी की ओर बढ़ रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में एक्यूट साइकोसिस नामक मानसिक बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले 100 व्यक्तियों में 20 एक्यूट साइकोसिस से ग्रसित हैं। डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर के भी काफी मरीज आ रहे हैं।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमर कुमार झा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगाें पर मेंटल प्रेशर अचानक पड़ता है। कुछ ही दिनों में एक्यूट साइकोसिस बीमारी हो जाती है। इस बीमारी में मरीज चीखता-चिल्लाता अधिक है।
अकेलापन व काम छूटना भी बड़ी वजह
डॉ. अमर कुमार झा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण 6 महीने लोग घराें में बैठे रह गए। कई की नौकरी छूट गई। आमदनी बंद होने से पौष्टिक आहार काैन कहे, भाेजन पर संकट आ गया। घर में एकाकी बैठे रहने से तनाव भी बढ़ने लगा। लोग अब एक्यूट साइकोसिस की चपेट में आने लगे हैं। सदर अस्पताल समेत कई स्थानों पर शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम हाेंगे।
अस्वस्थ होने पर खुद पता नहीं चलता
भागदौड़ की जिंदगी में शरीर की थकान आम बात है। इससे लोग किसी शारीरिक बीमारी का भी शिकार बन जाते हैं।शारीरिक बीमारी सभी को नजर आती है। लेकिन, मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर खुद को भी पता नहीं चलता। ऐसे लोगों को ही जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। 1992 में पहली बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया था।
- प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। शरीर को फिट और खुद को बिजी रखने के लिए रोज व्यायाम करना चाहिए। पौष्टिक आहार लेना चाहिए। थोड़ा भी बीमारी का संदेह होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
- डॉ. अमर कुमार झा, मनोरोग विशेषज्ञ
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Source From
RACHNA SAROVAR
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