शहर के लोहियानगर स्थित शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय को नई उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा इस महाविद्यालय को अब 38 सीटो पर नमांकन लेने की अनुमति प्रदान की है। मालूम हो कि पिछले साल इस महाविद्यालय को आयुष मंत्रालय द्वारा 30 सीटो पर नामांकन लेने की अनुमति प्रदान की थी। प्रचार्य डा. उमाशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि नया आवंटित सीट आर्थिक रूप से पिछले सामान्य श्रेणी के लिए है। प्राचार्य ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी सिद्ध और होम्योपैथ मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव शीला टिर्की ने पत्र जारी कर नए सत्र 2020-21 में 38 सीट पर नामांकन लेने का आदेश दिया है।
मालूम हो कि कुल सीटों में से 15 प्रतिशत सीट भारतीय कोटे से जबकि 85 प्रतिशत सीट राज्य कोटे से नीट परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों के लिए होगी। प्राचार्य ने अगले सत्र में मान्यता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि भारत सरकार के पत्र में महविद्यालय की मान्यता इस शर्त पर दी गई है कि बिहार सरकार द्वारा 31 दिसम्बर तक महाविद्यालय में जो कमी है, उसे पूरा कर लिया जाएगा।
प्राचार्य ने कहा-मान्यता िमलने से काॅलेजकर्मियाें में हर्ष
इसके अलावे प्राचार्य उमाशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद एक्ट 1970 के तहत महाविद्यालय में लिए निर्घारित न्यूनतम मानकाें के तहत कर्मियों की पूर्ति की जाए। ज्ञात हो कि स्वास्थ्य विभाग बिहार के प्रधान सचिव अमृत प्रत्यय ने आयुष मंत्रालय को पिछले दिन कर्मियों को पूरा करने के लिए अंडर टेकिंग देकर वर्ष 2020-21 के लिए नामांकन की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था। वहीं अगले साल के लिए भी कॉलेज को मान्यता मिलने के बाद कॉलेज में काफी हर्ष है।
िशक्षाविदाें ने दी बधाई
इस उपलब्धि के लिए फूलेना सिंह, मुकेश जैन, पूर्व प्रचार्य डा. विनोद पाठक, प्रो. वीरेन्द्र पांडेय, डा. विजय बहादूर सिंह, डा. शशिकांत चतुर्वेदी, डा. सीमांत सौरभ, डा. आरएन त्रिपाठी, डा. दिलीप कुमार वर्मा, डा. प्रमोद कुमार, डा. अनिल कुमार सहित अन्य ने प्रचार्य को बधाई दी है। मालूम हो कि दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय में वर्ष 2019-20 में नामांकन शुरू हुआ था। जिसके बाद इसी साल 24 जनवरी को पहली बार महाविद्यालय में अभ्यूदय 2020 के तहत आयुर्वेद, वेद और संस्कृति का संगम देखने को मिला था। पहली बार जिले में छात्रों को गुरु और शिष्य परंपरा को ध्यान में रखते हुए अग्नि के सामने उनका शिष्पयोनयन किया गया साथ ही साथ ही चरक शपथ दिलाई गई थी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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