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गांवों में जाकर बुनियादी स्वास्थ्य समस्या दूर करने की कार्ययोजना बनाएंगे अफसर

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांवों में जाकर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल करेंगे। लोगों से अधिकारी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की चर्चा करेंगे। कमियों का आकलन कर इसे दूर करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर सरकार को देंगे। सरकार पूरी समीक्षा कर योजना को स्वीकृति देगी।

स्वास्थ्य संबंधी जन शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा की और स्वास्थ्य सुविधा की पड़ताल का निर्देश दिया। मुख्य सचिव को अधिकारियों ने कोरोना जांच और इसके लिए किए जा रहे आवश्यक प्रयास की भी जानकारी दी।
सरकार गठन के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को और दुरूस्त करने की कवायद तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश के बाद मुख्य सचिव ने समीक्षा कर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ तत्काल समीक्षा की। अधिकारियों को गांव जाकर समस्या जान कर समाधान का निर्देश दिया। कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दौरा के क्रम में अधिकारी लोगों से बेहतर सेहत के लिए आवश्यक चर्चा भी करें। प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक जानकारी देने के लिए चिकित्सकों की टीम भी साथ रखने के लिए कहा गया है।

मेडिकल कॉलेजों में जल्द पढ़ाई शुरू करने का आदेश
पटना|राज्य सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव कौशल किशोर ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य को इस संबंध में पत्र भेजा है। नेशनल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 1 दिसंबर से ही मेडिकल कॉलेजों में पठन-पाठन शुरू करने का निर्देश दिया था।

इस निर्देश के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने संबंधी पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए पढ़ाई की व्यवस्था करनी है। राज्य में 9 सरकारी और इतने ही निजी मेडिकल कॉलेज हैं। कोरोना काल में इन सभी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई ठप है। इससे छात्रों को काफी नुकसान हो रहा है।

शिकायतों के निदान के लिए मुख्यालय स्तर पर काेषांग बनाने का दिया सुझाव
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से मुख्यालय से लेकर प्रखंड तक कि स्वास्थ्य की बुनियादी सेवाओं का हाल जाना। इसी क्रम में उन्हाेंने कहा कि अधिकारी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करें और स्वयं इस बात का आकलन करें कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है। यदि किसी जिले या प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की कोई कमी नजर आती हो, तो अधिकारी इसे दुरुस्त करने की कार्य योजना तैयार करें।

सरकार को योजना का ब्लू प्रिंट दें, ताकि संबंधित अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र को विकसित कर कमी दूर हो। उन्हाेंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के निदान के लिए मुख्यालय स्तर पर शिकायत कोषांग बनाने के सुझाव भी दिया।

आम लोगों की स्वास्थ्य सुविधाें के लिए संसाधन की नहीं हाेने दी जाएगी कमी
मुख्य सचिव ने कहा कि शिकायतें दो तरह की हो सकती हैं। इसमें कुछ का निदान तत्काल संभव है और कुछ शिकायतों को दूर करने में कुछ समय लग सकता है। जिन समस्या का तत्काल निदान संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तुरंत निपटा दिया जाए। जिस समस्या के समाधान में देरी हो सकती है, उसे भी कार्ययोजना बना कर समय निर्धारित कर समाधान कराएं।

लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्य सचिव ने भरोसा दिया कि आम लोगों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए संसाधन की कमी नहीं होने दी जाएगी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद थे।

शिक्षा विभाग ने जिलों से एक सप्ताह में मांगी शिक्षकों की रिक्ति

पटना|माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल सिंह ने गुरुवार को सभी डीईओ और डीपीओ (स्थापना) को पत्र भेजकर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या मांगी है। कहा गया है कि 31 दिसंबर 2020 को कट ऑफ डेट मानते हुए रिक्ति भेजनी है। निर्धारित समय में रिक्ति नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।

राजकीय, राजकीयकृत, परियोजना माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों और सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों की विवरणी निर्धारित विवरणी में भेजना है। इसके पहले भी 25 नवंबर को रिक्ति मांगी गई थी, जो अब तक नहीं आई है।



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मुख्य सचिव दीपक कुमार।


Source From
RACHNA SAROVAR
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