मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हमने पहले ही कार्यकाल में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। यहां इथेनॉल उत्पादन की काफी संभावना है। इथेनॉल उत्पादन बिहार का ही आइडिया है।
हमें खुशी है कि अब इस पर काम किया जा रहा है। इसके लिए गन्ना को प्राथमिकता में रखते हुए काम किया जाए। इससे गन्ना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। मक्का व फसल अवशेष से भी इथेनॉल के उत्पादन के लिए काम हो।
मुख्यमंत्री, सोमवार को उद्योग विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। यहां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की काफी संभावनाएं हैं। इसको हर स्तर पर साकार किया जाए।
सरकार द्वारा चलाई जा रही पोशाक योजना के तहत बच्चों के लिए पोशाक बनाना, पेवर ब्लॉक के निर्माण को बढ़ावा देने जैसे कई अन्य काम से रोजगार और आमदनी बढ़ेगी। युवाओं को उच्च प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे नया उद्योग-व्यवसाय कर सकें।
श्रमिकों की स्किल मैपिंग, बेतिया मॉडल की दी गई जानकारी
बैठक में उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने विभाग की योजनाओं व कार्यकलापों के बारे में बताया। उन्होंने 7 निश्चय पार्ट 2 के तहत योजनाएं, मुख्यमंत्री एससी-एसटी व अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना, क्लस्टर योजना, जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना 2020, दूसरे राज्यों से लौटे श्रमिकों की स्किल मैपिंग, बेतिया मॉडल, प्लास्टिक पार्क, इथेनॉल उत्पादन की कार्ययोजना, औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 आदि के बारे में पूरी जानकारी दी।
बैठक में उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, उद्योग विभाग के सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा एवं अनुपम कुमार, ओएसडी गोपाल सिंह आदि मौजूद थे।
मुख्यमंत्री के खास निर्देश
- सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग की सभी संभावनाएं साकार की जाएं
- युवकों के लिए उच्च प्रशिक्षण की व्यवस्था हो, ताकि वे नया उद्योग-व्यवसाय कर सकें
- नए उद्योग लगाने वालों को हरसंभव मदद की जाए
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Source From
RACHNA SAROVAR
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